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सोनीपत जिला कारागार में पहले भी हो चुकी है हत्या, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

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जिला कारागार में खाने बांटने के दौरान जगबीर की हत्या किए जाने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लग गई है। कारागार में मोबाइल व मादक पदार्थ मिलने के मामले अक्सर सामने आ जाते हैं, लेकिन जेल में अधिकारियों व कर्मियों की मौजूदगी में हत्या जैसी वारदात ने कारागार प्रशासन की कलई खोलकर रख दी है। जेल में हत्या की वारदात होना अधिकारियों की बड़ी चूक है। सोनीपत कारागार के अंदर व गेट पर पहले भी हत्या की वारदात हो चुकी है।
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जिला कारागार में सुरक्षा के दावों बार-बार सवाल उठते रहे हैं। जेल प्रशासन के साथ ही पुलिस और जिला प्रशासन सुरक्षा का हवाला देकर ज्यादातर मामलों में विभागीय कार्रवाई तक ही सीमित रह जाते हैं। समय-समय पर जेल से बाहर आने वाली वारदात बताती हैं कि अंदर के हालात सही नहीं है। जेल अधिकारियों के शांतिपूर्ण माहौल बनाने के प्रयास अधूरे हैं। कुछ समय पहले जेल में राजू बसौदी और मोनू लल्हेड़ी गैंग के सदस्यों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। इस मामले में 24 बंदियों-कैदियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। दोनों गैंग जेल में वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे थे। प्रशासन को राजू बसौदी की जेल ट्रांसफर करनी पड़ी।
सोनीपत कारागार में जगबीर से पहले जस्सू हलालपुर का मर्डर हो चुका है। सतीश उर्फ मोनू किलोहड़द पर 2004 में उस्तरा से बंदी जस्सू की गला रेतकर हत्या करने का आरोप था। उसके पास जेल में बंदूक होने और उससे गोली चलाने के भी आरोप लगे थे। उसके बाद 2013 में खरखौदा के शास्त्री कालोनी निवासी राजीव की जेल के मुख्य द्वार पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह जेल में बंद अपनी बुआ के लड़के से मिलने आया था। उसके बाद जेल में कड़ी सुरक्षा के दावे अफसरों ने किए थे। सोनीपत जिला कारागार को तोड़कर भी 8 बंदी फरार हो चुके हैं।
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चम्मच को अचानक हथियार का रूप देना भी बढ़ा रहा संदेह
जगबीर की हत्या चम्मच को घिसकर उसे हथियार की तरह बनाने के बाद उससे ताबड़तोड़ वार कर की गई है। सवाल उठता है कि जगबीर को शनिवार शाम को जेल भेजा गया था। उस समय तक ज्यादातर बंदी-कैदी अपनी बैरकों में चले जाते हैं। जेल प्रशासन को जानकारी थी कि जगबीर और संजय बुटाना में गैंगवार है। जगबीर के परिवार के लोगों ने भी उसकी जान को खतरा बताकर शनिवार को ही अफसरों को जानकारी देने की बात कही है। शनिवार शाम आए कैदी की रविवार सुबह ही हत्या कर दी गई। जेल में 14 बंदियों का एक साथ वारदात में शामिल होना व हत्या के लिए चम्मच घिसकर उसे हथियार बनाकर अचानक संभव नहीं है। इसके लिए पहले से षड्यंत्र रचा गया होगा। इससे जेल की सुरक्षा और अधिकारियों के दावे सवालों के घेरे में आ रहे हैं।
जगबीर का भाई बोला जेल प्रशासन की मिलीभगत
मृतक जगबीर के बड़े भाई कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया है कि हत्या जेल प्रशासन की मिलीभगत से हुई है। जगबीर एक अप्रैल 2020 को फरीदाबाद जेल से पैरोल पर आया था। उसको मार्च में फरीदाबाद जेल जाना था। परिवार के लोगों ने उसकी सुरक्षा के चलते ही पहले जेल बदलवाई थी। कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया है कि खानपुर के सुधीर और कृष्ण गाठा गिरोह की साजिश में अधिकारी शामिल हैं। उसका दावा है कि शनिवार को ही आईजी रोहतक से जेल अधीक्षक को जगबीर की जान को खतरा होने की सूचना जानकारी दिलवाई गई थी। साथ ही उसके भाई को झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाया है। साथ ही उसने उन्हें सुरक्षा के नाम मिले हथियार भी जमा कराए जाने की बात कही। साथ ही उसके परिवार को मिली सुरक्षा को वापस लेने पर भी उसने सवाल खड़े किए हैं। कृष्ण ने उन्हें लाइसेंसी हथियार उपलब्ध कराने की मांग की है।
कारगार में सुरक्षा बढ़ा दी है। सुरक्षा को लेकर पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। जेल में किसी के भी आने पर रोक लगा दी गई है। जेल में हुई हत्या की पुलिस के साथ ही मजिस्ट्रेट और जेल प्रशासन भी जांच कर रहा है।
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सतविंदर गोदारा, जेल अधीक्षक, सोनीपत।
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