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जानलेवा कफ सिरप: दवाओं के निर्माण से लेकर एक्सपायरी डेट तक में गड़बड़ी, कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश

Mon, 10 Oct 2022 10:46 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कुंडली, सोनीपत (हरियाणा)

सार

दवा कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की तैयारी है। 7 दिन में जवाब मांगा गया है। कंपनी के अंदर दवा में प्रयोग किए जा रहे साल्ट तक परीक्षण की व्यवस्था नहीं थी। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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अफ्रीकी देश गाम्बिया में बच्चों की मौत के बाद जांच में सामने आया कि सोनीपत में कफ सिरप बनाने वाली मेडेन फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने दवा बनाने में नियम-कायदों तक का उल्लंघन किया है। 66 बच्चों की मौत के बाद चर्चा में आई सोनीपत की दवा कंपनी पर तेजी से शिकंजा कसा जा रहा है। अब सामने आया है कि कंपनी की कई दवाइयों पर न केवल निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) तिथि नदारद है, बल्कि वैधता (एक्सपायरी) डेट में भी गड़बड़ी की गई है।

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इतना ही नहीं दवा में इस्तेमाल किए जा रहे साल्ट के परीक्षण तक की व्यवस्था कंपनी में नहीं थी। इसके आधार पर अधिकारियों ने कंपनी का निर्माण लाइसेंस तत्काल रद्द करने की सिफारिश की है। बताया जा रहा है कि सैंपल की जांच रिपोर्ट आते ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत की चार दवाइयों को जानलेवा घोषित किया है। यह चारों दवाइयां बच्चों की खांसी से संबंधित हैं। इनका निर्यात किया जाता है। गत दिनों कई देशों में कफ सिरप पीने के बाद बच्चों की हालत गिड़ने लगी थी। गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत हो गई थी। डब्ल्यूएचओ की तरफ से चेतावनी देने के बाद से चल रही जांच प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।
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कंपनी की दवाइयों की जांच करने पहुंची केंद्र व राज्य की टीमों को कई खामियां मिली हैं। खामियों के लिए कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। कारण बताओ नोटिस का कंपनी को सात दिन में जवाब देना होगा। नोटिस में कहा गया है कि जो खामियां मिली हैं उनके आधार पर मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किया जाए।

यह भी पढ़ें : अबकी दिवाली बिना पटाखों वाली: हरियाणा में पटाखे बनाने, चलाने और बेचने पर बैन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सख्त

सूत्रों की माने तो हरियाणा और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन, गाजियाबाद की टीम को कई खामियां मिली हैं। मेडेन फार्मास्युटिकल्स कंपनी ने सिरप पर बैच नंबर तक सही नहीं अंकित किया था। इसके साथ ही दवाइयों में निर्माता का नाम, निर्माण और वैधता की तिथियों में भी मानकों का पालन नहीं किया गया है।

अधिकारियों ने पाया कि प्रोपलीन ग्लाइकोल की गुणवत्ता परीक्षण तक की व्यवस्था कंपनी में नहीं थी। कंपनी ने डायथिलीन ग्लाइकोल और एथिलीन ग्लाइकोल के लिए प्रोपलीन ग्लाइकोल की क्वालिटी टेस्टिंग नहीं की थी। इनके मानक पूरे नहीं होने से कफ सिरप पीने वाले की मौत हो सकती है। 

सूत्रों की माने तो जांच में सामने आया है कि प्रोपलीन ग्लाइकोल सितंबर 2021 की निर्माण तिथि और सितंबर 2023 की वैधता तिथि के साथ सिरप में इस्तेमाल किया गया था, लेकिन वैधता तिथि नवंबर, 2024 बताई गई है।

कंपनी को नोटिस जारी
पूरे मामले में कोई भी अधिकारी बोलने के लिए तैयार नहीं है। सूत्रों का दावा है कि कंपनी को एक सप्ताह का नोटिस दिया गया है। इस वैधानिक प्रक्रिया के पूर्ण होते ही कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। इसके साथ ही दवाइयों के सैंपल की रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई 
देश में इस्तेमाल के साथ ही निर्यात होने वाली सभी दवाइयों की गुणवत्ता का पालन कराने की जिम्मेदारी ड्रग कंट्रोलर की होती है। वह स्थानीय ड्रग इंस्पेक्टर व क्षेत्रीय ड्रग इंस्पेक्टर की मदद से विधिवत जांच कराते हैं। इस कंपनी के मामले में कई नियमों का पालन नहीं किया गया है। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। 
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इस पूरे मामले की जांच ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) की टीम कर रही है। इसकी जांच डीसीजीआई कर रही है तो हम इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। -मनमोहन तनेजा, राज्य औषधि नियंत्रक।

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