शहर की सफाई के नाम पर सरकार से नगर निगम भारी भरकम राशि लेकर अपने पास रख लेता है। वह राशि पूरे साल निगम के पास रखी रहती है और उसे शहर की सफाई पर खर्च तक नहीं किया जाता है। इससे ही समझ सकते हैं कि ऐसे हालात में शहर की सफाई व्यवस्था कैसे सुधरेगी। सफाई के नाम पर पिछले साल नगर निगम ने 24 करोड़ रुपये सरकार से लिए, लेकिन उसमें से आधे भी खर्च नहीं गए। हालात यह रहे कि 12.5 करोड़ रुपये वित्त वर्ष खत्म होने पर लैप्स हो गए और वह नगर निगम को वापस भेजने पड़े। निगम अधिकारियों ने अब फिर सरकार से सफाई के नाम पर 26 करोड़ रुपये मांगे हैं, लेकिन वह भी खर्च किए जाएंगे या नहीं ये देखना होगा। निगम अधिकारियों के इस कदम पर ही शहर की सफाई व्यवस्था टिकी हुई है कि वह अगले एक साल में कैसी होगी।
नगर निगम को शहर की सफाई के लिए वर्ष 2016-17 में 24 करोड़ रुपये का बजट मिला था। इस बजट को पूरे साल सफाई पर खर्च करना था। इससे आउटसोर्स पर कर्मचारियों को रखने के अलावा सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने को कोई भी सामान खरीदा जा सकता है, लेकिन यह नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही ही कही जाएगी कि इन 24 करोड़ रुपयों में से शहर की सफाई पर केवल 11.5 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। इसमें से बचे रुपये मार्च 17 खत्म होते ही वापस चला गया और इस चालू वित्त वर्ष के लिए निगम को फिर से बजट मांगना पड़ा। इस बार निगम ने 26 करोड़ रुपये का बजट मांगा है और अधिकारी सही से काम करें तो इस 26 करोड़ रुपये से शहर में सफाई व्यवस्था के पूरे हालात बदल सकते हैं।
147 पक्के तो 283 कच्चे कर्मचारी कर रहे काम
नगर निगम में इस समय 147 पक्के व 283 कच्चे कर्मचारी काम कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आधे शहर की सफाई भी नहीं हो रही है। शहर की सड़कों पर कूड़ा फैला हुआ है। इस कारण ही लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले सप्ताह जहां केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए स्वच्छता सर्वेक्षण में सोनीपत शहर को 243वां स्थान मिला है। वहीं, निगम का दावा है कि शहर से 350 टन रोजाना कूड़ा निकाला जाता है।
पिछले साल नगर निगम के पास सफाई के लिए 24 करोड़ रुपये का बजट था। वह पूरा खर्च होना चाहिए था। इस बार जितना बजट तैयार किया गया है, उसको शहर की सफाई पर पूरा खर्च किया जाएगा। शहर को इस बार अच्छी रैंक दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
-वीरेंद्र सिंह हुड्डा, आयुक्त, नगर निगम