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Sonipat News: चरित्र पर संदेह में की थी बहन की हत्या, युवक व दोस्त को उम्रकैद

Wed, 11 Dec 2024 12:36 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सोनीपत में हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए युवक।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. जसबीर सिंह ने पीजी हॉस्टल संचालिका की हत्या के मामले में सुनवाई के बाद आरोपी उसके भाई व दोस्त को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। युवक ने बहन के चरित्र पर संदेह के चलते दोस्त संग मिलकर बहन की हत्या की थी।
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फरीदाबाद एनआईटी की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी डैनी पाउल ने 21 जनवरी, 2020 को सिविल लाइन थाना पुलिस को बताया था कि वह 20 दिन पहले सोनीपत में कोर्स करने आए थे। वह मूलरूप से गांव रभड़ा हाल में पंचशील कॉलोनी निवासी रीना मलिक के पीजी में कमरा किराये पर ले रखा था। 20 जनवरी, 2020 को उन्हें मार दिया की आवाज सुनाई दी थी। वह लॉबी में गए तो देखा था कि रीना मलिक पर उसका भाई रविंद्र उर्फ रजनीश उर्फ पालू चाकू से हमला कर रहा है। एक अन्य दीपक ने रीना मलिक को पकड़ रखा था। उसे देखकर हमलावर वारदात को अंजाम देकर भाग गए थे। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था।

मामले में जांच कार्रवाई करते हुए तत्कालीन जांच अधिकारी संजीव कुमार की टीम ने आरोपी रविंद्र व उसके दोस्त झज्जर के गांव बराही निवासी दीपक को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में पता लगा था कि रविंद्र बहन के चरित्र पर शक करता था, जिसके चलते वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश कर दिया था। अब एएसजे डॉ. जसबीर सिंह ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर दस-दस हजार रुपये जुर्माना किया गया है।
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बहन को दी थी व्यवहार सुधारने की चेतावनी

दोषी करार दिए गए रविंद्र को जब पुलिस ने पकड़ा था तो उसने बताया था कि उसे बहन के चरित्र पर शक था। इसके चलते ही उसने दोस्त दीपक को अपने पास बुलाया था। रात को वह और उसका दोस्त दीपक रीना के कमरे में गए थे। उन्होंने रीना को अपना व्यवहार सुधारने व चरित्र सही रखने को कहा था। रीना ने उनकी बात मानने के बजाय उनके साथ कहासुनी कर दी थी। इस पर दीपक ने उसकी बहन को पकड़ लिया था और उसने घर में रखे चाकू से कई वार कर हत्या कर दी थी।



सोशल मीडिया पर हुई थी दीपक व रविंद्र की दोस्ती

रविंद्र ने पुलिस को बताया था कि उसकी दीपक से छह माह पहले ही फेसबुक के जरिए दोस्ती हुई थी। आपस में बातचीत होने लगी थी। बहन की हत्या करने से दो दिन पहले ही रविंद्र ने दीपक को अपने पास सोनीपत बुलाया था। रविंद्र ने दीपक के साथ बहन के चरित्र को लेकर बातचीत की थी। दीपक इस साजिश में शामिल होने को राजी हो गया था। रविंद्र ने पुलिस को कहा था कि बहन को अधिकतर समय फोन पर व्यस्त होते देखकर उसके चरित्र पर शक हुआ था। टोकने पर वह झगड़ा करती थी। समाज में बदनामी के डर से उसकी हत्या कर दी थी।
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