संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। बिजली चोरी के मामले में सेशन जज जगजीत सिंह की कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए बिजली निगम के हक में फैसला सुनाया है। साथ ही वादी सुलेमान उर्फ सलामू को अपील का सारा खर्च वहन करने का आदेश दिया है।
यह अपील उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम की ओर से अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन), गन्नौर के 27 फरवरी 2025 को दिए फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। इसमें वादी सुलेमान के पक्ष में आंशिक डिक्री पारित की गई थी।
मूलरूप से वादी ने बिजली निगम की ओर से लगाए गए 78,653 रुपये के जुर्माने और 8,000 के शमन शुल्क को चुनौती दी थी। विभाग का आरोप था कि वादी सीधे खंभे से कट मारकर बिजली चोरी कर रहा था।
उक्त मामले में निचली अदालत ने वादी को राहत देते हुए विभाग को निर्देश दिया था कि जब तक विशेष अदालत बिजली चोरी का निर्धारण नहीं कर लेती तब तक जुर्माने की वसूली न जाए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने माना कि बिजली अधिनियम 2003 के तहत बिजली चोरी और उसके मूल्यांकन से जुड़े मामलों में दीवानी अदालत का क्षेत्राधिकार नहीं है। ऐसे मामलों का निपटारा केवल विशेष अदालतों में किया जाना चाहिए।
अदालत ने पाया कि निचली अदालत ने क्षेत्राधिकार के कानून को समझने में गलती की है। चोरी के मामलों में सिविल कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अदालत ने निचली अदालत के फैसले और डिक्री निरस्त कर दी। अदालत ने वादी सुलेमान का दावा खारिज कर दिया है। अपील का खर्च भी वादी पर डाला गया।