मेरी मासूम बेटी पैर की हड्डी टूट जाने से दो घंटे तक बेड पर कराहती रही। डॉक्टर बाहर से महंगी दवाइयां लाने के लिए दबाव बनाते रहे। बेटी के उपचार के लिए ब्याज पर लाए 15 हजार में से 10 हजार रुपये भी दे दिए, फिर भी ऑपरेशन नहीं हुआ। शिकायत करने पर खानपुर रेफर कर दिया। दिए पैसे तो वापस मिल गए हैं, लेकिन मेरी बेटी का समय पर उपचार नहीं करने वालों को सजा जरूर मिलनी चाहिए। बुधवार को खानपुर मेडिकल कॉलेज में दाखिल सात वर्षीय अंजलि की मां सरोज और पिता मनोज ने यह बात कही।
दंपति ने बताया कि 26 नवंबर को अचानक अंजलि छत से गिर गई थी। जिससे उसके पैर की हड्डी टूट गई। उन्होंने उसे सोनीपत के सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टर एसपी शर्मा ने उसका ऑपरेशन कराने की सलाह दी। 12 हजार रुपये का खर्चा बताया। आरोप है कि डॉक्टर एसपी शर्मा ने 10 हजार रुपये ले लिए और जब इसकी रसीद मांगी तो जवाब मिला रसीद के 12 हजार देने होंगे। मजबूरी में उनको पैसे देने पड़े। इतना ही नहीं डॉक्टरों ने पैसे लेने के बाद भी ऑपरेशन के समय दवाई भी बाहर की लिखी और बाहर से ही दवाई लाने का दबाव डाला। जब बाहर दवाई नहीं मिली तो डॉक्टरों ने बेटी का ऑपरेशन करने से मना कर दिया।
मेरी बेटी के दर्द का हिसाब कौन देगा
अंजली की मां सरोज का कहना है कि ऑपरेशन थियेटर में उसकी बेटी कराहती रही, लेकिन डॉक्टरों ने दवा नहीं मिलने के नाम पर ऑपरेशन नहीं किया। जब सीएमओ से शिकायत की तो पैसे वापस करके रेफर कर दिया गया। इस दौरान उसकी बेटी ने असहनीय दर्द महसूस किया। साथ ही उसका मानसिक उत्पीड़न भी हुआ। आखिर इन सबका हिसाब कौन देगा।
शिकायत में सीधे डॉक्टर एसपी शर्मा पर पैसे लेने का आरोप लगा है। हालांकि शिकायतकर्ता ने पैसे वापस मिलने की लिखित में सूचना दी है, लेकिन यह जांच का विषय है। जल्द जांच रिपोर्ट मांगी गई है। इस आधार पर ही कार्रवाई होगी।
-जसवंत सिंह पूनिया, सीएमओ, सामान्य अस्पताल सोनीपत
डाक्टर शर्मा इंकार कर चुके पैसे लेने से
वहीं आरोपी डॉक्टर एसपी शर्मा पहले ही कह चुके हैं कि उन्होंने पैसे नहीं लिए। ऑपरेशन थियेटर में दवाइयां नहीं थी। इसलिए दवा लाने के लिए कहा था। पैसे दवा विक्रेता ने लिए थे और उसने वापस भी कर दिए। इसमें उनका कोई कसूर नहीं है।