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पैसे के अभाव में अटके 100 करोड़ से अधिक के काम

Wed, 02 Dec 2015 11:52 PM IST
development impasse
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एक कहावत है कि पैसा भगवान तो नहीं पर भगवान से कम भी नहीं। यह कहावत हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) पर बिल्कुल सटीक बैठती है। अथॉरिटी की आर्थिक सेहत चिंता का विषय बनी हुई है। करोड़ों रुपये के प्रस्ताव जहां लटके हैं वहीं नए प्रस्ताव बनाए भी नहीं जा रहे हैं। हुडा को कई माह पहले विकास कार्यों के लिए आखिरी बार फंड मिला था। उसके बाद से हुडा को फंड नहीं मिला। बताया जा रहा है कि ऐसी स्थिति पूरे प्रदेश में है। हुडा ने इस स्थिति से निपटने के लिए मुख्यालय स्तर पर लोन भी अप्लाई किया है, लेकिन वह भी अब तक अप्रूव नहीं हो पाया। इस कारण हुडा में कार्यरत अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक को चिंता बनी हुई है। हालांकि अभी कर्मचारियों और अधिकारियों की तनख्वाह समय पर आ रही है, लेकिन किसी भी तरह का बाहरी काम हुडा कर नहीं पा रही। पैसों की कमी ही वजह थी, जिसकी वजह से पिछले दिनों सेक्टर-16 के लिए एक्वायर की गई जमीन रिलीज करनी पड़ी।
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100 करोड़ से अधिक के प्रपोजल नहीं हुए पास
हुडा द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के प्रपोजल भेजे गए थे, लेकिन यह प्रपोजल आज तक पास नहीं हुए हैं। दो प्रपोजल तो ऐसे हैं, जिन्हें भेजे भी लगभग 1 साल हो गया है। इनमें से सेक्टर-4 में बनाए गए स्टेडियम में 50 करोड़ की लागत से मल्टीपर्पज हॉल तैयार करना था। इसी स्टेडियम में 50 करोड़ की लागत से पवेलियन भी बनाना था। दोनों के प्रस्ताव एक साल से अटके हैं। इसी तरह बहालगढ़ रोड से जीटी रोड पर दीवान फार्म हाउस के सामने से जाने वाले सड़क की विशेष मरम्मत का प्रपोजल भी अटका है। 65 मीटर चौड़ी इस रोड की विशेष मरम्मत 4 करोड़ रुपए में होनी थी। गोहाना के सेक्टर-7 में सड़कों की विशेष मरम्मत के लिए 1-1 करोड़ रुपये के प्रपोजल भी पास नहीं हुए हैं। यह दोनों प्रपोजल भेजे 3 माह से अधिक का समय हो गया है।

34 करोड़ रुपए ने अटकाए दो काम
मौजूदा समय में हुडा द्वारा दो काम कराए जा रहे हैं इनमें से रैनीवैल के लिए लाइन बिछाना और राठधाना का 65 मीटर चौड़ा रोड शामिल है। दोनों कामों के लिए हुडा को 34 करोड़ रुपये की जरूरत है, लेकिन बजट नहीं आ रहा। इसी कारण दोनों काम रूके हुए हैं। बता दें कि हाल ही में सेक्टर 14-15 डिवाइडर रोड की विशेष मरम्मत भी हुडा ने अलग-अलग प्रोजेक्ट में बचे हुए 1 करोड़ रुपए से की थी। ये ही आखिरी काम ऐसा था जोकि हुडा ने पूरा कर लिया है।
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पिछली बार मई माह में हुई थी फंडिंग
फंड के लिए हुडा को इस कदर परेशानी झेलनी पड़ रही है कि लगभग हर माह आने वाले फंड को आए 7 माह हो चुके हैं। पिछली बार मई माह में फंडिंग हुडा सोनीपत को मिल पाई थी। सूत्र बताते हैं कि वह फंडिंग भी सभी कार्यों के लिए पर्याप्त नहीं थी। उस समय केवल सड़कों की मरम्मत का काम ही हो सका था। इसके अलावा अन्य कोई प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया जा सका।

अधिकारी और कर्मचारी भी चिंतित
हुडा की आर्थिक स्थिति को लेकर अधिकारी और कर्मचारी वर्ग दोनों में चिंता है। कार्यालयों में अधिकतर समय इसी विषय पर बातचीत होती रहती है। कर्मचारी और अधिकारी पूर्व में एमआईटीसी विभाग के तरह अन्य विभागों का कयास लगाते हैं कि उस विभाग में मर्ज होंगे या फिर किस विभाग में। हालांकि फिलहाल तक अधिकारी और कर्मचारियों की तनख्वाह समय पर आ रही है। जब तनख्वाह की दिक्कत आएगी तो दबी आवाज में होने वाली कंगाली की बातें, उभरकर सामने आएंगी।

क्यों आई यह कंगाली, यह दो हैं कारण
* हुडा की इस कंगाली का कारण जिलास्तरीय ही है। सबसे बड़ी वजह नया भू-अधिग्रहण कानून है। इस कानून के कारण पहले कम दामों में अधिग्रहीत की गई जमीनों का मुआवजा भी हुडा को अधिक देना पड़ गया। हुडा ने तो जमीन मालिकों को पैसा चुका दिया, लेकिन इन्हासमेंट के तौर पर अलॉटियों से मांगी गई रकम अभी तक नहीं मिल पाई है।
* प्रॉपर्टी में मंदी हुडा की इस कंगाली की दूसरी बड़ी वजह है। प्रत्येक जिले में हुडा के रेजीडेंसियल साइट तो फिर भी बिक चुकी है, लेकिन कामर्शियल साइट को बेचने में दिक्कत आ रही है। हर जिले में सिर्फ एक या दो सेक्टर को छोड़कर अन्य सभी सेक्टरों में कामर्शियल साइट की नीलामी भी होती है, लेकिन अधिक दामों के कारण कोई खरीदार नहीं मिल रहा।

फंड की समस्या बनी हुई है, केवल सोनीपत ही नहीं बल्कि हर जिले में ये ही समस्या बनी हुई है। हमारे कुछ विकास कार्यों की गति धीमी पढ़ गई हैं, कुछ प्रस्ताव भी पास होकर नहीं आए हैं। विभाग के उच्चाधिकारी लगातार इस समस्या को दूर करने की कोशिश में लगे हुए हैं।
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-दीपक गोयल, एक्सईएन, हुडा, सोनीपत।
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