खरखौदा। गांव मटिंडू निवासी सेवानिवृत्त फौजी अनार सिंह ने सड़क हादसे में बड़े बेटे को खोने के बाद अब छोटे बेटे, पुत्रवधू व पोता-पोती को भी खो दिया है। अनार सिंह ने फौजी बेटे मनोज को खो देने के चार वर्ष पूरे होने से पहले ही अब परिवार के चार सदस्यों की मौत से गमगीन हैं। कैलाना के पास हुए हादसे ने उनके छोटे बेटे अशोक व बड़े बेटे मनोज की पत्नी मंजू, पोती आयुषि व पोते आयुष की जिंदगी को लील लिया है। हादसे के बाद से गांव में मातम पसरा हुआ है। ढांढस बंधाने वालों की आंखों से खुद ही आंसू निकल रहे हैं।
गांव मटिंडू निवासी अनार सिंह फौज में थे। सेवानिवृत्ति के बाद सोनीपत में एक बैंक में नौकरी करने लगे। बड़ा बेटा मनोज जाट रेजिमेंट में भर्ती हुआ तो परिवार में खुशियां और बढ़ गईं। लाखु बुआना की मंजू के संग मनोज की शादी हुई और मंजू ने बेटी आयुषि को जन्म दिया, लेकिन लखनऊ में ड्यूटी के दौरान 22 सितंबर 2018 को मनोज की सड़क हादसे में मौत हो गई। परिवार पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट गया था। उस समय मनोज की पत्नी मंजू गर्भवती थी। कुछ माह बाद मंजू ने बेटे को जन्म दिया तो परिवार ने यह सोचकर ढांढस बांध लिया कि मनोज अब बेटे आयुष के रूप में वापस लौट आया है। मनोज के छोटे भाई अशोक की शादी भी मंजू की छोटी बहन मोनिका से हुई थी। शादी के बाद से उन्हें अभी तक कोई संतान नहीं है। ऐसे में सभी का प्यार आयुषि और आयुष को मिलता था। फौजी मनोज की मौत के बाद मंजू सोनीपत स्थित आर्मी कैंटीन में नौकरी करने लगी थी। अशोक सोनीपत में बैंक में सेवारत था। अब हादसे में मनोज का तो पूरा परिवार ही खत्म हो गया है।
दोनों भाई लाखु बुआना में दो बहनों मंजू व मोनिका से शादीशुदा थे। मोनिका मायके गई हुई थी, जिसे रविवार को लेने के लिए अशोक को जाना था। इसी बीच मंजू ने भी मायके जाकर आने की बात कह दी। जिस पर सुबह मंजू घर से सोनीपत आर्मी कैंटीन में चली आई। वहीं अशोक दोनों बच्चों आयुष व आयुषि को लेकर आई-10 गाड़ी से सोनीपत पहुंचा। जहां से उसने मंजू को अपने साथ लिया और नहरों के रास्ते होते हुए वह लाखु बुआना पानीपत के लिए चल पड़े। लेकिन शायद होनी को कुछ और ही मंजूर था। कैलाना के पास हुए हादसे में चारों का यह आखिरी सफर बन गया।
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परिवार में बच गए बुजुर्ग दंपती व पुत्रवधू
सड़क हादसे में परिवार के चार सदस्यों की मौत के बाद अब बुजुर्ग दंपती अनार सिंह व उनकी पत्नी कमलेश के अलावा अशोक की पत्नी मोनिका ही रह गए हैं। हादसे की जानकारी जब ग्रामीणों को लगी तो वह अनार सिंह के घर की तरफ दौड़ पड़े। परिवार के चार सदस्यों के इस तरह चले जाने से हर कोई स्तब्ध है और बिलखते परिवार को ढांढस बंधाने में लगा है। हालांकि ढांढस बंधाते हुए उनकी आंखें नम हो रही हैं।