फोटो :: सोनीपत के खरखौदा-दिल्ली मार्ग से बिल्कुल सटाकर लगाई गई रेलिंग को लेकर सवाल उठाते दहिया
खरखौदा। स्टेट हाईवे-18 के किनारे लगाई जा रही लोहे की रेलिंग (क्रैश बैरियर) को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दहिया खाप के प्रधान जयपाल दहिया ने रेलिंग लगाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह व्यवस्था सड़क सुरक्षा बढ़ाने की बजाय हादसों का कारण बन सकती है।
जयपाल दहिया ने कहा कि सड़क किनारे लगाई जाने वाली लोहे की रेलिंग या क्रैश बैरियर का उद्देश्य वाहनों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा करना होता है, लेकिन तकनीकी मानकों को नजरअंदाज करके इन्हें सड़क से सटाकर लगाया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे वाहन चालकों को सड़क किनारे पर्याप्त जगह नहीं मिलेगी और दुर्घटना की स्थिति में वाहन सीधे रेलिंग से टकरा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सड़क कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की गाइडलाइन के अनुसार सड़क किनारे रेलिंग लगाने के लिए दूरी और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना जरूरी होता है।
सामान्य तौर पर सुरक्षा रेलिंग सड़क से करीब आधा मीटर से डेढ़ मीटर दूरी पर या उससे भी दूर लगाए जाते हैं ताकि वाहन टकराने पर नियंत्रित हो सकें। यहां पर नियमों को ताक पर रखकर इन्हें सड़क से सटाकर ही लगा दिया गया, ऐसे में अगर कोई पैदल चलने वाला वाहन से बचकर सड़क से नीचे उतरना चाहे तो उसे तो जगह ही नहीं मिलेगी। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की कि सड़क सुरक्षा मानकों की जांच कर रेलिंग उचित दूरी पर लगाई जाए, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।