सोनीपत। नगर निगम चुनाव के तहत की गई वार्डबंदी को लेकर आपत्तियां अब अदालत में पहुंच गई हैं। अधिवक्ता सौरभ सचदेवा ने वार्डबंदी को कानून के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए इसे असांविधानिक बताया है। उन्होंने न्यायालय में याचिका दायर कर दी है। इस संबंध में सुनवाई के लिए अदालत ने 8 जनवरी की तारीख तय की है।
अधिवक्ता सौरभ ने बताया कि हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 6 के अनुसार वार्डबंदी सरकार की ओर से कराई जाने वाली जनगणना के आधार पर की जानी चाहिए। आरोप है कि वार्डबंदी समिति ने जनगणना के स्थान पर परिवार पहचान पत्र (फैमिली आईडी) के आंकड़ों को जनसंख्या का आधार बनाया जो अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने आपत्ति पत्र में उल्लेख किया कि हरियाणा परिवार पहचान अधिनियम, 2021 के तहत पीपीपी का उद्देश्य पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ देना है न कि जनसंख्या निर्धारण।
उनका कहना है कि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनके परिवार पहचान पत्र नहीं बने हैं। ऐसे में वास्तविक जनसंख्या का आकलन किए बिना की गई वार्डबंदी पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी आपत्ति जताई कि वार्डबंदी समिति के गठन में नियमों का पालन नहीं किया गया।
नियमों के अनुसार समिति में विभिन्न दलों अथवा रुचि समूहों से जुड़े पांच पार्षदों का होना आवश्यक है जबकि वर्तमान समिति में विपक्ष से केवल एक सदस्य शामिल बताया गया है।