संगठन ने समता चौक से लेकर उपमंडलीय परिसर तक जुलूस प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन अध्यक्षा डॉ. सुनीता त्यागी ने किया।
डॉ. त्यागी ने कहा कि मुरथल में राष्ट्रीय राजमार्ग पर अनेक महिलाओं के साथ हुआ गैंगरेप हमारे समाज के लिए कलंक है। चश्मदीद लोगों के बयान व परिस्थिति जन्य साक्ष्य साफ दर्शाते हैं कि यह बड़े पैमाने पर महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया गया है।
इसके अलावा महिलाओं के साथ मारपीट कर बुरी तरह से दुर्व्यवहार किया है। इस घटना को लेकर पुलिस-प्रशासन का रवैया बेहद शर्मनाक है।
मीडिया के सामने गवाह खुलकर बयान देते हैं, लेकिन पुलिस के आते ही बदल जाते हैं। कहीं पुलिस मामले का दबाने के लिए बयान न देने का दबाव तो नहीं डाल रही।
हालांकि बाद में एक महिला ने साहस दिखाया और मामले का पता चला कि वास्तव में मुरथल में हाइवे पर महिलाओं के साथ गैंगरेप हुआ था। अब उसे घेरने का प्रयास किया जा रहा है।
संगठन की टीम ने गांव का दौरा किया तो पता चला कि वहां पर महिलाओं के साथ भयावह तांडव हुआ है। संगठन इसकी घोर निंदा करता है।
इस तांडव के बाद संगठन को पुलिस व सरकार पर महिलाओं को न्याय दिलाने का कोई भरोसा नहीं है। इसलिए उन्होंने एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है।
उनकी मांग है कि इस घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में सीबीआई से करवाएं। जांच के लिए एक महीने का समय दिया जाए।
यौन-हिंसकों तथा घटना को दबाने की साजिश करने वाला पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को छह महीने के अंदर सजा दी जाए। इतना ही नहीं एफएसएल मधुबन को पुलिस विभाग से मुक्त कर इसे पीजीआई रोहतक के फोरेंसिक विभाग के अंतर्गत लाया जाए।
इस मौके पर गीता, चंद्रकला, सावित्री, रितु विरोधिया, डॉ सुरेखा, मंजू, अनिता त्यागी, सोनिया, मोनिका, प्रवीन व ऊषा आदि अनेक महिलाएं उपस्थित थी।