संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने 3 अक्तूबर से पीआर धान की सरकारी खरीद शुरू कराए जाने के सरकार के फैसले को किसानों के संघर्ष की जीत करार दिया है। एसकेएम सदस्यों ने कहा कि किसानों के जोरदार विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार को अपना फैसला पलटना पड़ा और धान खरीद शुरू करने के लिए राजी हो गई है। इसके साथ ही एसकेएम धान खरीद के लिए शुरू किए गए विरोध प्रदर्शन को वापस लेने की घोषणा करता है।
संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के वरिष्ठ सदस्य बलबीर सिंह राजेवाल ने शनिवार को कुंडली बॉर्डर पर बातचीत में बताया कि सरकारी खरीद में देरी किए जाने के विरोध में मंत्रियों के अलावा, सांसदों और विधायकों को स्थानीय किसानों के विरोध और घेराव का सामना करना पड़ा। यह सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहे। धान की खरीद तुरंत शुरू कराने के लिए हजारों किसान आज विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए। हरियाणा के सीएम को भी नहीं बख्शा गया और करनाल में किसानों ने उनके आवास का भी घेराव किया। भिवानी में कृषि मंत्री के घर का घेराव किया गया।
सोनीपत, जींद, सिरसा, कुरुक्षेत्र, पानीपत, अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला और अन्य जगहों पर भी जोरदार धरने-प्रदर्शन किए गए। करनाल और कैथल में नाराज किसानों ने मंडी समिति के दफ्तर बंद कराए। करनाल जैसे कुछ स्थानों पर आढ़ती संघ ने भी किसानों को उनके विरोध में समर्थन देने के लिए आगे कदम बढ़ाया। पंजाब के कई स्थानों से भी खबरें आई हैं, जहां कांग्रेस के मंत्रियों और अन्य नेताओं को आज किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा। पंजाब के जालंधर, गुरदासपुर, होशियारपुर, पटियाला और अन्य जिलों में मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को विरोध का सामना करना पड़ा। मनसा और संगरूर जैसे कुछ स्थानों पर डीसी कार्यालयों में भी विरोध प्रदर्शन किया गया।
एसकेएम केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की प्रतिबद्धता और अखंडता पर सवाल उठाता है, भले ही वह कहते आ रहे हैं कि खरीद पहले की तरह ही जारी रहेगी। केंद्र सरकार ने अपने पहले के फैसले को तुरंत पलटते हुए 3 अक्तूबर से ही खरीद शुरू करने पर सहमति जताई। यह किसानों के एकजुट संघर्ष की जीत है। एसकेएम ने इसके साथ ही धान खरीद के लिए विरोध प्रदर्शन को वापस लेने की घोषणा की है।
गांधी व शास्त्री जयंती पर किसानों ने रखा एक दिन का उपवास
धरनास्थलों पर महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई गई और अनेक किसानों ने एक दिन का उपवास रखा। एसकेएम सदस्यों ने कहा कि शास्त्री द्वारा दिया गया जय जवान, जय किसान का नारा आज भी किसान आंदोलन में लगातार गूंज रहा है। यह एक ऐसा नारा है जो देश के किसानों को उनके अपार योगदान के लिए गौरवान्वित करता है और विशेष पहचान देता है। किसानों और उनकी सहकारी समितियों पर निवेश करके लाल बहादुर शास्त्री ने राष्ट्र निर्माण किया था। एसकेएम आज भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्याग्रह की कसौटी सत्य और अहिंसा के बल पर किसान आंदोलन को शांतिपूर्वक चला रहा है। गांधी के दिखाए मार्ग पर ही आगे बढ़ रहे हैं।