फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sonipat News: कैंपर व बोतल के सहारे 35 हजार से अधिक की आबादी

Thu, 02 Jan 2025 02:16 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
विज्ञापन
फोटो :26: सोनीपत के गांव राई में टैंकर से पेयजल लेते क्षेत्रवासी। संवाद
विज्ञापन
सोनीपत। पानी ले लो पानी...की आवाज से इन दिनों राई क्षेत्रवासियों की सुबह आंख खुलती है। क्योंकि राई का भूमिगत जल पीने लायक नहीं रह गया है। भूमि से निकल रहे पेयजल में टीडीएस जानलेवा स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में लोगों को कैंपर व बोतल के पानी के सहारे ही रहना पड़ता है। सैकड़ों लोगों ने आरओ सिस्टम लगवा रखे हैं। इसके बावजूद समाधान नहीं निकल पा रहा है। राई व आसपास के क्षेत्र में वर्ष 2003 के आसपास तेजी से औद्योगिक क्षेत्र बसाया गया। इससे यहां ग्रामीणों के साथ बाहर से आकर रहने वाले लोगों की जनसंख्या भी तेजी से बढ़ने लगी। अब राई व कुंडली क्षेत्र में जहां स्थानीय ग्रामीणों की संख्या हजारों में हैं, वहीं बिहार व यूपी समेत अन्य प्रदेशों से आकर बसे लोगों की संख्या लाखों में पहुंच गई है। अकेले राई क्षेत्र में 35 से 40 हजार लोग रह रहे हैं। उद्योग स्थापित होने के साथ ही यहां भूमिगत जलस्तर भी कम होने लगा है। यहां भूमिगत जलस्तर 15 से 40 मीटर तक पहुंच गया है। भूजल दूषित होने के बाद यहां करीब पांच साल से पानी भी बिकने लगा है। क्षेत्रवासी यह तो जानते थे कि पानी अमूल्य धरोहर है, लेकिन अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी का मूल्य चुकाना पड़ेगा यह शायद लोगों ने नहीं सोचा था। क्षेत्रवासी अब पेयजल आपूर्ति के लिए यमुना के पास ट्यूबवेल लगाए जाने की बाट जोह रहे हैं।
विज्ञापन


खरीदकर पीना पड़ रहा पानी

पहले जमाने में ग्रामीण कहते थे कि पानी से पतला कुछ नहीं होता। अब लोगों को खरीदकर पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। मध्यम वर्गीय ज्यादातर परिवारों ने घर में आरओ सिस्टम लगवा लिए हैं, लेकिन जो इसका खर्च वहन नहीं कर पाते वह रोजाना 15 से 20 रुपये का कैंपर खरीदकर गला तर कर रहे हैं। एक आरओ करीब सात से 15 हजार रुपये में आता है। उसके बाद उसके मेंटेनेंस पर भी लगातार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यहां तक की 150 रुपये का आने वाला फिल्टर तो हर माह बदलवाना पड़ता है। इसके लिए मैकेनिक का चार्ज भी देना पड़ता है।

टीडीएस की मात्रा अब कई गुणा

आरओ मैकेनिक नीरज के अनुसार राई गांव में टीडीएस का स्तर 1800 से 2500 तक है। यह खतरनाक श्रेणी में हैं। शुद्ध पेयजल में टीडीएस 90 से 100 तक ही होना चाहिए।
विज्ञापन


बढ़ रही पेट की बीमारी

ग्रामीण अमित, अंकित, संदीप व मनोज बताते हैं कि पानी का स्तर काफी नीचे जा चुका है। भूजल भी पीने लायक नहीं रह गया है। अगर सीधा सबमर्सिबल से पानी निकालकर पीते हैं तो पेट की बीमारियां लग जाती हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में लीवर व कैंसर के मरीज भी मिल रहे हैं। ग्रामीण महेश व प्रदीप बताते हैं कि औद्योगीकरण हुआ तो भूजल भी प्रभावित हो गया। अब करीब दस साल से घर में आरओ लगवा रखा है। उसका ही पानी पीने को मजबूर है।



राई व लिवान गांव में पेयजल की समस्या है। इसे कई बार नगर निगम की बैठक में उठाया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम में भी उठाया था। कुछ माह पहले एसएमडीए की बैठक में राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में इंटरमीडिएट बूस्टिंग स्टेशन लगाने की मंजूरी मिली थी। इसे जल्द बनवाने की पहल की जाएगी।

- पुनीत राई, नगर पार्षद, वार्ड-8



150 टीडीएस तक पानी पीने लायक होता है। इससे ज्यादा टीडीएस का पानी पीने से पेट संबंधित बीमारियां शुरू हो जाती हैं। उल्टी, दस्त, एलर्जी और हड्डी के कमजोर होने की आशंका रहती है। खराब पानी पीने से हड्डी में विटामिन व मिनरल्स खत्म हो जाते हैं।

- डॉ. मनजीत राठी, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल सोनीपत



मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में इंटरमीडिएट बूस्टिंग स्टेशन बनाया जाएगा। वहां गांव लिवान और राई में दो बूस्टिंग स्टेशन बनाकर पानी आपूर्ति की जाएगी। इस कार्य के लिए 10.19 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी। यह मंजूरी 10 जुलाई 2024 को चंडीगढ़ में हुई एसएमडीए की बैठक में मिली थी। इसका बजट आते हुए टेंडर लगाकर पानी की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा।
विज्ञापन


- अमित कौशिक, कार्यकारी अभियंता, सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें