सोनीपत। कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति मान्य है और जगह-जगह गड्ढ़े हैं। ऐसे में तेज गति में दौड़ रहे वाहन के सामने गड्ढ़ा आने पर दुर्घटना होने की आशंका बढ़ जाती है।इस पर प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) केजीपी को देश के सबसे हाईटेक हाई-वे में शुमार करता है लेकिन यह मार्ग वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। 5763 करोड़ रुपये खर्च कर तैयार मार्ग आज मरम्मत के अभाव में खतरनाक बना हुआ है।
तेज रफ्तार से दौड़ते वाहनों के सामने अचानक आने वाले गड्ढे गंभीर चुनौती बन गए हैं। ऐसे समय पर चालक का वाहन पर नियंत्रण खोने के साथ दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। दिन के समय तो गड्ढों से बचा जा सकता है लेकिन रात को स्थिति बेहद चिंताजनक हो जाती है।
वाहन चालकों का कहना है कि सड़क की खोदाई के बाद संबंधित एजेंसियों ने उसकी समुचित मरम्मत कराने में गंभीरता नहीं दिखाई है। यदि जल्द ही इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
वाहन चालकों में बढ़ रही चिंता
दिल्ली और हरियाणा के बीच नियमित रूप से सफर करने वाले लोगों ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि एक्सप्रेस-वे जैसी उच्चस्तरीय सड़क पर इस प्रकार के गड्ढे होना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है बल्कि यात्रियों के जीवन के साथ खिलवाड़ भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आधुनिक और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था के दावे तभी सार्थक होंगे जब सड़कों की नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत सुनिश्चित की जाएगी।
केजीपी एक्सप्रेस-वे राष्ट्रीय महत्व का मार्ग है इससे प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। सड़क की खोदाई के बाद यदि समय पर मरम्मत नहीं की जाती तो यह सीधे-सीधे लोगों की जान जोखिम में डालने जैसा है। संबंधित विभाग को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
- संजय कौशिक, राई
रात के समय इन गड्ढों को देख पाना बेहद मुश्किल होता है। तेज रफ्तार में अचानक गड्ढा आने पर वाहन असंतुलित हो जाता है और बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन को किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कराना चाहिए।
- पंकज शर्मा, यात्री व व्यवसायी
रोजाना गुजरते है एक लाख से अधिक वाहन
देश के सबसे आधुनिक कुंडली-गाजियाबाद-पलवल ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का निर्माण करीब 5763 करोड़ की लागत से हुआ था। दिल्ली से वाहनों का बोझ कम करके जाम से मुक्ति दिलाने के लिए इसे बनाया गया था। इससे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, गुजरात, दिल्ली के करीब एक लाख से अधिक वाहन रोजाना गुजरते हैं। लेकिन इस एक्सप्रेस-वे पर अब सफर करना खतरनाक है।