सरकार ने भले ही होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना मरीजों को मेडिकल किट पहुंचाने के आदेश प्रशासनिक व स्वास्थ्य अधिकारियों को दिए हो, लेकिन यहां होम आइसोलेट मरीजों की मेडिकल किट से ऑक्सीमीटर ही गायब हो है। किट में ऑक्सीमीटर ही सबसे महंगा है और उसको ही गायब कर दिया गया है। जब अधिकतर मरीजों की मेडिकल किट में ऑक्सीमीटर नहीं मिले तो इसकी शिकायत सीएम तक पहुंच गई। जिसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने उन शिकायत करने वालों के घर चंद घंटों में ऑक्सीमीटर पहुंचा दिए। इस मामले में अधिकारी अभी ऑक्सीमीटर की कमी के कारण ऐसा होने की बात कह रहे हैं और जिस तरह से ऑक्सीमीटर आ रहे हैं, उसे अलग से मरीजों के यहां पहुंचाने की बात कही है।
कोरोना का प्रकोप बढ़ने पर अस्पतालों में बेड नहीं होने के बाद से बिना लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेट किया जा रहा है। इनमें से कुछ का ऑक्सीजन लेवल अचानक नीचे पहुंच गया और जब उनकी हालत ज्यादा खराब हुई तो परिजन उनको अस्पताल में लेकर पहुंचे। लेकिन उस समय तक ज्यादा देर होने से काफी मरीजों की मौत भी हुई। इसको देखते हुए सरकार ने आदेश दिए कि होम आइसोलेट मरीजों को एक मेडिकल किट उपलब्ध कराई जाए, जिसमें ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर, स्टीमर, दवाइयां रहेंगी और इसमें सबसे अहम ऑक्सीमीटर है, जिससे मरीज अपने ऑक्सीजन लेवल की जानकारी लेते रहेंगे। यह मेडिकल किट जिले में अभी तक 1400 से ज्यादा मरीजों को घर पहुंचाई गई है। पहले ही इस किट को काफी कम मरीजों के घर तक पहुंचाया गया और जितने मरीजों के घर तक पहुंचाया गया, उनमें भी अधिकतर की किट से ऑक्सीमीटर ही गायब थे, जबकि ऑक्सीमीटर ही मरीजों के लिए सबसे जरूरी है। किट से ऑक्सीमीटर गायब होने की शिकायत शहर के सेक्टर में रहने वाले कई मरीजों ने सीएम को ट्विटर पर कर दी, जिससे प्रशासन हरकत में आया। इसकी शिकायत करते ही उन मरीजों के यहां ऑक्सीमीटर पहुंचा दिया गया, जबकि शिकायत नहीं करने वालों के यहां ऑक्सीमीटर नहीं पहुंचा। इसके अलावा मेडिकल किट पहुंचाने वाले स्वास्थ्यकर्मी सभी को यह कह रहे हैं कि उसमें से थर्मामीटर व स्टीमर को लौटाना होगा, लेकिन इस तरह किसी अन्य संक्रमित के थर्मामीटर व स्टीमर कोई इस्तेमाल करेगा तो उससे संक्रमित होने का डर बना रहेगा।
वर्जन
जितनी भी मेडिकल किट को होम आइसोलेट मरीजों के लिए तैयार कराया गया था, उनका अन्य सामान जितना आ रहा है, उनके मुकाबले ऑक्सीमीटर काफी कम आ रहे हैं। अभी तक केवल 350 ऑक्सीमीटर आए थे और इसलिए ही यह समस्या आ रही है। जितने भी ऑक्सीमीटर आते हैं, उनको मरीजों के यहां अलग से पहुंचा दिया जाता है। इस समस्या का समाधान कराया जा रहा है।
- श्यामलाल पूनिया, डीसी