फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुस्लिम नाम के गांवों में रहना नहीं पसंद

Mon, 03 Apr 2017 12:39 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
विज्ञापन
गांव - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
प्रदेश में गांवों का नाम बदलने का सिलसिला शुरू हुआ तो अब लोगों ने मुस्लिम नाम के गांवों पर आपत्ति जताई है। लोगों ने साफ कर दिया कि उनको मुस्लिम नाम वाले गांव पसंद नहीं हैं और उनके नाम बदले जाएं। गोहाना क्षेत्र में ऐसे कई गांव हैं। लोगों ने सीएम के नाम पत्र भेजकर जल्द से जल्द इन गांवों के नाम बदलवाने की बात कही है। लोगों ने सरकार से पहले ही खुद अपने गांव का नाम तय भी कर लिया है और वह पत्राचार में गांव के सरकारी नाम के साथ ही अपना रखा हुआ नाम लिखने लगे हैं।
विज्ञापन


देश की आजादी से पहले काफी गांवों में मुस्लिमों की ज्यादा आबादी थी और इस कारण ही उन गांवों के नाम मुस्लिम शब्दों के नाम पर पड़े है। गोहाना क्षेत्र में ऐसे ही खानपुर कलां, खानपुर खुर्द, सिकंदरपुर माजरा, गढ़ी उजाले खां, गढ़ी सराय काले खां आदि हैं। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय इन गांवों से मुस्लिम भले ही पाकिस्तान में जाकर बस गए, लेकिन इन गांवों का नाम आज भी उसी समय से मुस्लिम शब्दों पर चल रहा है। इसको लेकर भगत फूल सिंह ग्रामीण विकास फाउंडेशन के डायरेक्टर सतीश जांगड़ा ने सीएम को पत्र भेजा है।

पत्र में कहा गया है कि यहां से मुस्लिम पाकिस्तान जा चुके हैं, लेकिन आज भी उनके नाम पर ही गांवों के नाम हैं। इन गांवों के नाम बदलकर भगत फूल सिंह के नाम पर किया जाना चाहिए। क्योंकि उस क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने में भगत फूल सिंह व उनकी बेटी सुभाषिनी का अहम योगदान रहा है। हालांकि, महिला कालेज व यूनिवर्सिटी का नाम भगत फूल सिंह के नाम पर रखा गया, लेकिन गांव का नाम आजतक नहीं बदला गया है। वहीं, लोगों ने खानपुर कलां को भगत फूल सिंह नगर लिखना भी शुरू कर दिया है और सीएम को भेजे गए पत्र में भगत फूल सिंह नगर लिखने के बाद ही खानपुर कलां लिखा गया है।
विज्ञापन


भारत-पाकिस्तान के बंटवारे से पहले कई गांवों में मुस्लिम आबादी ज्यादा थी और इस कारण ही उन गांवों के नाम मुस्लिमों ने अपने नाम के शब्दों के आधार पर रखे थे। वहां से मुस्लिमों के पाकिस्तान जाने के बाद भी आजतक उनके रखे हुए नाम ही चले आ रहे है। उन नाम को बदलने के लिए सीएम को पत्र लिखा गया है जो उनको मिल चुका है। इन गांवों के नाम बदलवाने का लोग पूरा प्रयास कर रहे हैं।
विज्ञापन

- सतीश जांगड़ा, डायरेक्टर, भगत फूल सिंह ग्रामीण विकास फाउंडेशन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें