सुविधाओं की कमी के कारण कोई भी खिलाड़ी पिछड़ नहीं सके, इसके लिए साई (भारतीय खेल प्राधिकरण) ने अहम फैसला लिया है। अब बाहर के खिलाड़ियों तक को बेहतर सुविधाएं देने के लिए साई ने रास्ता खोल दिया है। साई सेंटर में कोई भी बाहरी खिलाड़ी आकर प्रैक्टिस कर सकता है। उसके लिए खिलाड़ियों को किसी तरह की फीस नहीं देनी होगी, लेकिन उस खिलाड़ी की उम्र 18 साल से कम होनी जरूरी है और वह उस स्तर का होना चाहिए जो आगे बेहतर प्रदर्शन कर सके।
इसके साथ ही साई से बाहर के कोच भी अपने खिलाड़ियों को सेंटर में लाकर प्रैक्टिस करा सकते हैं, लेकिन उसके लिए कम से कम 10 खिलाड़ी होने जरूरी हैं। वहीं साई के मैदान में स्कूल व एसोसिएशन भी प्रतियोगिताएं करा सकते हैं, जिसके लिए कोई रुपया भी खर्च नहीं करना होगा।सोनीपत साई सेंटर की डायरेक्टर ललिता शर्मा ने बताया कि साई ने देश में 21 नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए हैं, जिनमें दो हरियाणा के हिस्से में आए हैं।
सोनीपत साई सेंटर व रोहतक की नेशनल बॉक्सिंग एकेडमी को नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है। जहां रोहतक में बॉक्सिंग का एक्सीलेंस सेंटर रहेगा, वहीं सोनीपत में कुश्ती, एथलेटिक्स, कबड्डी, हॉकी, आर्चरी का एक्सीलेंस सेंटर रहेगा। उनके अनुसार यहां साई के चयनित खिलाड़ी सुबह व शाम को प्रैक्टिस करते हैं और सुबह 9 से दोपहर 3 बजे के बीच साई सेंटर की सभी सुविधाएं व कोच बाहरी खिलाड़ियों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस तरह सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक कोई भी खिलाड़ी आकर प्रैक्टिस कर सकता है, जहां पहले कम एंड प्ले स्कीम के तहत बाहरी खिलाड़ी आते थे और उनको 40 रुपये फीस जमा करनी होती थी। वहीं अब यह सबकुछ फ्री होगा और खिलाड़ियों को सेंटर के कोच व अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन ऐसे खिलाड़ी का नेशनल प्रतियोगिता का मेडल विजेता, खेलो इंडिया व एक्सीलेंस में शामिल, प्रदेश स्तर का मेडल विजेता आदि होना चाहिए।
डायरेक्टर ललिता शर्मा ने बताया कि साई सेंटर के बाहर के कोच भी खिलाड़ियों को लाकर प्रैक्टिस कराना चाहते हैं तो वह द्रोणाचार्य अवार्डी, एनआईएस से डिग्री या डिप्लोमा धारक, नेशनल प्रतियोगिता का मेडल विजेता, ओलंपिक व वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेला हुआ होना चाहिए। इनके अलावा कोई किसी तरह की प्रतियोगिता कराना चाहता है तो उनको अब साई के मैदान व इंडोर हॉल भी दिया जा सकता है। उनसे मैदान व हॉल का कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा, लेकिन बिजली खर्च व सफाई खर्च कोई होता है तो वह उनको देना होगा।
यह केवल इसलिए किया जा रहा है, जिससे खिलाड़ी ऐसे माहौल व मैदान पर प्रैक्टिस करते है जो उनको आगे प्रतियोगिता में मिलते है। डायरेक्टर ललिता शर्मा के अनुसार कई बार खिलाड़ी शुरूआत में अच्छा प्रदर्शन करता है, लेकिन नेशनल व अन्य जगहों पर इसलिए पिछड़ जाता है, क्योंकि वह ऐसे माहौल व मैदान पर प्रैक्टिस नहीं करता था। उनके अनुसार भविष्य में खिलाड़ी ज्यादा से ज्यादा मेडल जीत सके, उसको देखते हुए ऐसा किया जा रहा है।