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रोमानिया बॉर्डर पर खुले आसमान के नीचे बर्फबारी में बिताई रात, 24 घंटे बाद मिला प्रवेश

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यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों को जल्द निकलवाने की मांग को लेकर विदेश मंत्रालय के बाहर धरने पर ब? - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों को वतन वापसी के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। यूक्रेन में फंसे जिले के विद्यार्थियों में से दो विद्यार्थी सोमवार शाम रोमानिया पहुंच गए। इनमें खरखौदा निवासी सिद्धार्थ सैनी व ठरू उल्देपुर निवासी तन्नू उर्फ खुशी शामिल हैं। इसकी सूचना के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है। हालांकि रोमानिया में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को लंबा इंतजार करना पड़ा।
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खरखौदा निवासी सिद्धार्थ सैनी रविवार को ही साथियों के साथ रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गया था, लेकिन किसी भी विद्यार्थी को बॉर्डर पार करने की अनुमति नहीं दी गई। यही नहीं उन्हें ठहरने के लिए न किसी शेल्टर की सुविधा दी गई और न ही पेट भरने के लिए खाना। माइनस आठ डिग्री तापमान के बीच विद्यार्थियों को खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी। देर रात हुई बर्फबारी के बावजूद विद्यार्थियों के लिए बॉर्डर बंद ही रहा। सभी विद्यार्थी रात भर बर्फबारी के बीच कांपते रहे। करीब 24 घंटे के बाद सोमवार शाम 6 बजे भारतीय दूतावास के सहयोग से विद्यार्थियों को रोमानिया में प्रवेश दिया गया।
रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले के कारण जिले के कई विद्यार्थी यूक्रेन के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं। परिजन लगातार अपने बच्चों से फोन पर संपर्क बनाए हुए और यूक्रेन के हालात की जानकारी ले रहे हैं। रूस द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों के बीच विद्यार्थी मेट्रो स्टेशनों पर फंसे हुए हैं। विद्यार्थियों के पास खाद्य सामग्री भी खत्म होने को है। यूक्रेनी सेना ने उन्हें बाहर न निकलने की सख्त हिदायतें दी गई हैं। जिससे विद्यार्थियों मेें भय का माहौल बना हुआ है। परिजनों ने यूक्रेन में फंसे सभी विद्यार्थियों को जल्द निकलवाने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि युद्ध के बीच फंसे बच्चों की चिंता में न खाना अच्छा लग रहा है, न रात को नींद आ रही है। हर समय बच्चों की चिंता सताती रहती है।
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13 घंटे के सफर के बाद पहुंची रोमानिया
ठरू उल्देपुर निवासी कुलदीप ने बताया कि उनकी भतीजी तन्नू उर्फ खुशी भी यूक्रेन में ही फंसी हुई थी। भारतीय दूतावास द्वारा उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की गई। भारतीय समयानुसार सोमवार सुबह 4 बजे 60 विद्यार्थियों को पहले बस द्वारा रेलवे स्टेशन ले जाया गया। इनमें तन्नू भी शामिल थी। उसके बाद करीब 13 घंटे का सफर तय कर ये विद्यार्थी रोमानिया बॉर्डर पहुंचे और शाम करीब 6 बजे बॉर्डर पार कर रोमानिया हवाई अड्डे पर पहुंच गए हैं। कुलदीप ने बताया कि खुशी जल्द ही भारत वापस आएगी।
बर्फबारी के बीच भूखे-प्यासे बिताए 24 घंटे
खरखौदा निवासी डॉ. राजबीर सैनी ने बताया कि भारतीय दूतावास के निर्देशानुसार बेटा सिद्धार्थ सैनी साथियों के साथ रविवार को ही बस से रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गया था, लेकिन उन्हें बॉर्डर पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। यही नहीं उन्हें न ही खाने-पीने को कुछ दिया गया और ना ही ठहरने की व्यवस्था की गई। माइनस तापमान के बीच सभी बच्चे ठंड से कांपते रहे। देर रात बर्फबारी शुरू होने के बाद भी किसी को उन पर रहम नहीं आया। रात भर सभी युवा खुले आसमान के बीच बर्फबारी मेें ही फंसे रहे। सोमवार शाम को भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने रोमानिया सरकार से बात की। जिसके बाद उन्हें प्रवेश की अनुमति मिली।
भूखे मरने को मजबूर हैं बच्चे, विदेश मंत्रालय नहीं दे रहा कोई जवाब : कौशिक
यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों के अभिभावक सोमवार को दिल्ली विदेश मंत्रालय पर विद्यार्थियों की शीघ्र सुरक्षित वापसी के लिए इकट्ठा हुए। विदेश मंत्रालय की तरफ से अभिभावकों को कोई जवाब नहीं दिया गया, न ही उनकी कोई बात सुनी गई। अभिभावक अरुण कौशिक भारतीय ने बताया कि यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों का खाना भी खत्म हो गया है, उनको किसी तरह की सहायता नहीं दी जा रही। बच्चे मेट्रो स्टेशनों में बंद हैं व भूखे मरने को मजबूर हैं। अगर बच्चों की शीघ्र सुरक्षित वापसी का इंतजाम नहीं किया गया तो वे ठंड व भूख से मर जाएंगे। विदेश मंत्रालय के बाहर मौजूद भारी पुलिस बल ने किसी भी अभिभावक को अधिकारियों से नहीं मिलने दिया। अभिभावकों ने जब विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मिलने की जिद की व धरना दिया तो अभिभावकों को गिरफ्तार कर मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया। अभिभावकों ने इसे सरकार की लापरवाही व तानाशाही बताया। इस मौके पर अरुण कौशिक भारतीय, राजीव सिंह, आशीष जैन, वंदना, वीना, अंजली, सुनील शर्मा, सुनील बालियान मौजूद रहे।
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