फोटो :39: सोनीपत के गांव राई में अपनी छत पर उगाए पौधों की देखभाल करती दीप्ति कौशिक। संवाद
- फोटो : अमावां चौराहा पर हंगामा करते ग्रामीणों को समझाती पुलिस।
सोनीपत। शहरों में बढ़ते कंक्रीट के जंगल के बीच हरियाली सहेजना किसी चुनौती से कम नहीं, लेकिन राई गांव की दीप्ति कौशिक ने अपने शौक और लगन से यह साबित कर दिया कि इच्छाशक्ति हो तो छत भी बगिया बन सकती है। दीप्ति की छत आज हार-सिंगार, वैजंती, रजनीगंधा और अन्य सुगंधित फूलों से महक रही है, जो न सिर्फ उनके घर बल्कि आसपास के माहौल को भी ताजगी से भर रही है।
दीप्ति ने बागवानी की शुरुआत महज दस गमलों से की थी। समय के साथ यह शौक जुनून में बदला और आज उनकी छत पर करीब 70 पौधे लहलहा रहे हैं। फूलों के साथ-साथ उन्होंने कुछ औषधीय और सजावटी पौधे भी लगाए हैं, जिससे उनका यह प्रयास सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी बन गया है।
शौक से बनी सकारात्मक आदत
दीप्ति कौशिक बताती हैं कि रोजाना पौधों की देखभाल करना उनके लिए तनाव दूर करने का सबसे बेहतर तरीका है। सुबह-शाम पौधों के बीच समय बिताने से मानसिक सुकून मिलता है और वातावरण भी शुद्ध रहता है।
आसपास के लोग भी हो रहे प्रेरित
दीप्ति की इस हरियाली भरी पहल से पड़ोसी और रिश्तेदार भी प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग उनसे पौधे लगाने और उनकी देखभाल के तरीके सीख रहे हैं। उनका मानना है कि अगर हर घर की छत या आंगन में कुछ पौधे लग जाएं तो पर्यावरण को बड़ी राहत मिल सकती है। दीप्ति कहते है कि हरियाली के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि जागरूकता और प्रेम की जरूरत होती है। उनकी छत पर खिले फूल न सिर्फ सुगंध बिखेर रहे हैं, बल्कि लोगों को प्रकृति से जुडऩे की प्रेरणा भी दे रहे हैं।
एक्सपर्ट व्यू
गार्डनर सुरेश कुमार ने बताया कि सर्दियों में पौधों की वृद्धि धीमी होती है, इसलिए फालतू छंटाई से बचें। पालक, मेथी, गाजर जैसी सर्दी सहन करने वाली सब्जियों को नियमित देखें। किसी भी नए फलदार पौधे या युवा पौधों को ठंड से बचाने के लिए कपड़े या प्लास्टिक से ढक दें। ठंड में पौधों की पानी की जरूरत कम हो जाती है। बहुत पानी डालने से जड़ सड़ सकती है।