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Sonipat News: मां ने जुटाई फीस, बेटी ने ट्रैक पर गोल्ड जीत रचा इतिहास

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सोनीपत। कभी मां को बेटी की फेडरेशन कप की प्रवेश फीस जुटाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी थी, आज उसी बेटी के गले में एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक है।
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गांव गुमड़ की धाविका किरण पहल ने जापान में आयोजित 20वें एशियन गेम्स-2026 के महिला 4 गुणा 400 मीटर रिले में भारतीय टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतकर सोनीपत का नाम अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर चमका दिया। भारतीय टीम ने 3:29.69 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण अपने नाम किया।
भारतीय महिला रिले टीम में किरण पहल के साथ एमआर पूवम्मा राजू माचेत्तिरा, प्राची चौधरी और विथ्या रामराज शामिल रहीं। किरण ने पहले लेग में तेज शुरुआत करते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इसके बाद भारतीय धाविकाओं ने शानदार तालमेल के साथ दौड़ पूरी कर देश के लिए स्वर्ण पदक हासिल किया। एथलेटिक्स हरियाणा के महासचिव प्रदीप मलिक ने बताया कि भारत ने आठ साल बाद इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता है।
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गुमड़ की गलियों से ओलंपिक ट्रैक तक पहुंची
किरण पहल का सफर किसी तैयार मंच से शुरू नहीं हुआ। गांव गुमड़ की सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने लगातार मेहनत के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। 5 अगस्त 2000 को जन्मी किरण ने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई ओपन स्कूल से पूरी की। वर्तमान में वह कोच आशीष छिक्कारा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं। उनकी मां माया देवी और पिता ओम प्रकाश ने बेटी के खेल सफर में उनका साथ दिया।
2019 में पहली बड़ी सफलता, इसके बाद पदकों का सिलसिला
किरण ने वर्ष 2019 में मिक्स्ड रिले में स्वर्ण जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। 2022 में कजाकिस्तान के कॉन्टिनेंटल टूर में 400 मीटर और मिक्स्ड रिले में स्वर्ण हासिल किया। इसी वर्ष नेशनल गेम्स में 4 गुणा 400 मीटर रिले में रजत और मिक्स्ड रिले में स्वर्ण जीता। इंटरस्टेट चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया।
50.92 सेकेंड का मीट रिकॉर्ड और ओलंपिक तक पहुंच
वर्ष 2024 में इंटरस्टेट चैंपियनशिप की 400 मीटर स्पर्धा में किरण ने 50.92 सेकेंड के मीट रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। वह ओलंपिक में 400 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। वर्ष 2026 में भी उनका प्रदर्शन जारी रहा। 9 मई, 13 जून और 16 जून को 400 मीटर में उन्होंने स्वर्ण पदक जीते। इंटरस्टेट चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर उन्होंने एशियन चैंपियनशिप के लिए भी क्वालीफाई किया।
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मां की मेहनत का भी मिला स्वर्णिम जवाब
किरण की इस उपलब्धि के पीछे परिवार का संघर्ष भी जुड़ा है। मां माया देवी ने बेटी के मुश्किल दौर में उसका हौसला बनाए रखा और जरूरत पड़ने पर फेडरेशन कप की प्रवेश फीस तक जुटाई। किरण के भाई रविंद्र पहल और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनकी जीत पर खुशी जताई। गांव गुमड़ से लेकर पूरे सोनीपत में उनकी उपलब्धि पर जश्न का माहौल है।
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