सोनीपत। जिले में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप)-1 लागू तो कर दिया गया है लेकिन एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम बंद पड़ा है। सिस्टम करीब एक साल से खराब है जिससे न तो विभाग को और न ही आम लोगों को यह पता चल पा रहा है कि शहर की हवा कितनी जहरीली हो चुकी है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इस समय वायु गुणवत्ता लगातार गिर रही है और मौसम में ठंडक घूलने से प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में प्रदूषण मापक यंत्र का बंद होना शहर के लिए चिंता का विषय बन सकता है। मॉनिटरिंग सिस्टम बंद होने के कारण वास्तविक समय के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की जानकारी नहीं मिल पा रही।
प्रशासन यह तय नहीं कर पा रहा कि वायु प्रदूषण की स्थिति ‘अच्छी’, ‘मध्यम’, ‘खराब’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में है। ऑनलाइन पोर्टलों और मोबाइल एप पर भी सोनीपत का डेटा अपडेट नहीं हो रहा जिससे नागरिकों को भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
शहर के लोगों का कहना है कि जब हवा की गुणवत्ता की सही जानकारी नहीं होगी तो वे अपने स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम भी नहीं उठा सकते।
ग्रैप के तहत शुरू हुई सख्ती
हालांकि प्रशासन ने ग्रैप-1 के नियमों को लागू करने के लिए कमर कस ली है। नगर निगम व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों और मुख्य मार्गों पर धूल, कूड़ा जलाने और वाहन उत्सर्जन पर निगरानी रख रही हैं। जहां-जहां नियमों का उल्लंघन मिलेगा वहां जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाएगी।
रिपेयर में देरी बनी परेशानी
सोनीपत का एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन सालभर से खराब पड़ा है। विभाग ने इसकी मरम्मत के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे लेकिन अब तक यंत्र की रिपेयर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। पहले यही यंत्र जिले की वायु गुणवत्ता का ऑनलाइन रिकॉर्ड देता था लेकिन अब यह सुविधा पूरी तरह ठप हो चुकी है।
स्वास्थ्य पर असर की आशंका
चिकित्सक का कहना है कि सर्दियों में वायु प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा, एलर्जी, फेफड़ों के संक्रमण और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में प्रदूषण मापक यंत्र का बंद रहना आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
वर्जन
प्रदूषण मापक यंत्र तकनीकी खराबी के कारण लंबे समय से बंद है। इसकी मरम्मत की प्रक्रिया जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इसे ठीक कर लिया जाएगा। इस बीच विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि ग्रैप के नियमों का सख्ती से पालन हो सके। -निर्मल कश्यप, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी