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घर सुरक्षित पहुंचकर मैसेज करना, यही मेरे पैसे होंगे

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कपिल शर्मा
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गन्नौर। यूक्रेन में बिगड़ते हालातों के बीच गन्नौर शहर के कई विद्यार्थी अपने घर सुरक्षित पहुंच चुके हैं, जबकि कई विद्यार्थी अभी भी वहां फंसे हुए हैं। इनमें गन्नौर शहर निवासी दो भाई ऋषभ व प्रतीक हैं, जो रोमानिया बॉर्डर पर रुके हुए थे। परिजनों से बात करते हुए प्रतीक ने बताया कि रोमानिया के लोगों ने हमें खाना ही नहीं दिया, बल्कि हमारा दिल भी जीत लिया। प्रतीक ने बताया कि उसने दोस्तों के साथ रोमानिया के होटल मेें खाना खाया। खाना खाने के बाद करीब दो हजार का बिल बना, लेकिन होटल मालिक ने पैसे लेने से इंकार कर अपना फोन नंबर दिया और कहा कि बेटा सुरक्षित घर पहुंचने पर मुझे फोन या मैसेज करना, यही मेरा बिल होगा।
गन्नौर शहर निवासी दो भाई यूक्रेन के विनित शीया शहर में मेडिकल की पढ़ाई करने गए थे। यूक्रेन पर हमला करने के बाद दोनो भाई वहां फंस गए। जिसके बाद परिजनों की रात की नींद गायब हो गई थी। पिता अमरीश गौतम ने बताया कि उनके बच्चे 2 फरवरी को सुबह रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। बार्डर पर माइनस 6 डिग्री तापमान था। जिसके बाद वह दोनों भाई 10 घंटे का सफर तय कर रोमानिया की राजधानी बूखारेस्ट पहुंचे। वहां वह अलग-अलग शेल्टर होम में रुके। जहां उन्हें हर तरह की सुविधा दी गई। संवाद
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भारतीय सेना के विमान व टाटा एयर लाइंस से की वतन वापसी
ऋषभ ने बताया कि सेल्टर होम में उन्हें खाने पीने से लेकर वाई-फाई व हर तरह की सुविधा दी जा रही थी। ऋषभ ने बताया कि भीड़ होने के बाद भी वहां पर सफाई की व्यवस्था अच्छी थी। वह भारतीय सेना के विमान में करीब 3 बजे बुखारेस्ट से निकला और 11 बजे हिंडन हवाई अड्डे पर पहुंचा। उसका भाई टाटा एयर इंडिया की फ्लाइट से दोपहर 2:30 बजे बुखारेस्ट से निकला और 10 बजे इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर पहुंचा।
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