मुख्याध्यापक पद से सेवानिवृत्त जगदेव सिंह दहिया अपनी पत्नी ओमपति दहिया के साथ।
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चार विदेश तो दो देश में रहकर बढ़ा रही मान
जगदेव सिंह दहिया बताते हैं कि बड़ी बेटी डॉ. संगीता शहर के जीवीएम कन्या महाविद्यालय में भौतिक विज्ञान की प्रोफेसर हैं। जबकि चौथे नंबर की बेटी डॉ. कल्पना दहिया पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में गणित की प्रोफेसर हैं। दूसरे नंबर की बेटी मोनिका ने बायोटेक से पीएचडी की है। वह कनाडा के टोरेंटो में वैज्ञानिक है। तीसरे नंबर की बेटी डॉ. नीतू ने भी बायोटेक में पीएचडी की है।
वह वाशिंगटन डीसी में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन) में वैज्ञानिक हैं। पांचवें नंबर की बेटी डॉ. डेजी दहिया ने गणित विषय में पीएचडी की है। वह वाशिंगटन डीसी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन (एनआईएच) में वैज्ञानिक हैं। जबकि सबसे छोटी बेटी रुचि दहिया यूएसए के यूनियन ऑफ एरिजोन में गणित विषय में शोध कर रही हैं। जगदेव बताते हैं कि उन्होंने अपनी बेटियों का बेटे की तरह पालन-पोषण किया है। उन्हें बेटियों पर नाज है।
किसानों को मशरूम से जोड़कर किया आत्मनिर्भर
सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक जगदेव सिंह दहिया को सोनीपत में मशरूम उत्पादन का जनक कहा जाता है। मास्टर जगदेव बताते हैं कि 1979 में उन्होंने मशरूम की खेती के बारे में पढ़ा। उसके बारे में जानकारी जुटाई। साथ ही हिमाचल प्रदेश में कृषि संस्थान में जाकर इस बारे में प्रशिक्षण भी लिया। उसके बाद 1980 में पहली बार सोनीपत में मशरूम की खेती शुरू की।
इससे अच्छी आमदनी होने लगी। वर्ष 2003 तक मशरूम की खेती की और अन्य किसानों को भी मशरूम की खेती करने के लिए जागरूक किया। वर्ष 2003 में पंचकूला तबादला हो गया। 31 दिसंबर 2006 को पंचकूला से बतौर मुख्याध्यापक सेवानिवृत्त हुए। वापस आने के बाद फिर मशरूम की खेती की और किसानों को भी जागरूक किया।
वे वर्ष 1992 से 1998 तक मशरूम सोसायटी ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने 1989 में सरकार से मुरथल में मशरूम रिसर्च सेंटर बनाने की मांग की थी। वे बताते हैं कि मशरूम उत्पादन से जुड़कर कई किसानों ने अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है।
बेटियों को आगे बढ़ने के लिए बेटे के समान दिए अवसर
मास्टर जगदेव सिंह बताते हैं कि हमने बेटियों को बेटा समझकर पढ़ाया और पालन-पोषण किया। बेटियों को बेटों के समान ही अवसर दिए। बेटियों ने भी खुद को साबित किया। आज उनकी प्रतिभा निखरकर सामने आई है। आज छह बेटियां देश-विदेश में नाम चमका रही हैं। मेरी बेटियां साक्षात देवी हैं, वह बेटों से बढ़कर हैं। जगदेव दहिया और उनकी पत्नी ओमवती दहिया बेटियों की प्रतिभा से गौरवान्वित हैं।