सोनीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश गुप्ता की अदालत ने गांव कुमासपुर में राजकीय स्कूल के पीटीआई की गोलियां मारकर हत्या करने के मामले में चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषियों को उम्रकैद व प्रत्येक को 90500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। मामले में चार अन्य आरोपी बरी हो गए। पीटीआई अपने चचेरे भाई की हत्या में गवाह था। जिसके चलते उनकी हत्या कर दी गई थी।
गांव अलीपुर निवासी प्रदीप ने 23 अक्तूबर, 2015 को थाना मुरथल पुलिस को शिकायत दी थी कि उसके ताऊ का लड़का निरंजन मान गांव कुमासपुर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पीटीआई (डीपी) के पद पर नियुक्त था। वह घटना के दिन सुबह उसके साथ स्वीफ्ट कार में सवार होकर अलीपुर से स्कूल में आ रहा था। जब वह गांव कुमासपुर के पास फिरनी पर पहुंचे तो पहले से ही घात लगाए बैठे दूसरी स्वीफ्ट कार सवार बदमाशों ने उसकी कार पर दो गोली मार दी थीं। बाद में बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। जिसमें वह भाग गया था। उसने भागते हुए देखा था कि बदमाशों ने करीब दस गोली मारकर उसके भाई निरंजन की हत्या कर दी थी। वारदात को अंजाम देकर हमलावर गांव के अंदर से फरार हो गए थे। निरंजन मान ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। प्रदीप ने बताया कि उसके ताऊ का लड़का निरंजन उसके भाई अरुण उर्फ कमांडो की 24 फरवरी, 2015 को दिल्ली में हुई हत्या के मामले में गवाह था। उसने बताया था कि अरुण की हत्या के मामले में गवाह होने के चलते निरंजन की हत्या की गई है। पुलिस ने प्रदीप के बयान पर गांव ताजपुर, दिल्ली निवासी सुनील उर्फ टिल्लू व उमेश उर्फ काला तथा अन्य के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। तत्कालीन थाना प्रभारी अजय धनखड़ की टीम ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने मामले में दिल्ली के ताजपुर गांव के सुनील उर्फ टिल्लू, उमेश उर्फ काला, दिल्ली के शाहबाद डेयरी निवासी चंदन व दिल्ली के अलीपुर निवासी राजेश समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
मामले की सुनवाई करते हुए एएसजे राजेश गुप्ता कीं अदालत ने सुृील उर्फ टिल्लू, उमेश, राजेश व चंदन को दोषी करार दिया है। चारों को उम्रकैद व प्रत्येक को 90500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसमें भादसं की धारा 302 में उम्रकैद व 50000 रुपये जुर्माना, धारा 307 में पांच साल कैद व 30000 रुपये जुर्माना, 341 में एक माह की सजा व 500 रुपये जुर्माना तथा 27 आम्र्स एक्ट में तीन साल की सजा व 10000 रुपये जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।