इसके बाद भी किसान नेता नहीं संभले। गणतंत्र दिवस पर किसान नेताओं की अनदेखी करके निर्धारित समय से कई घंटे पहले बैरिकेड तोड़कर परेड शुरू कर दी। उस परेड को शुरू करने के 60 मिनट के अंदर ही माहौल खराब होना शुरू हो गया, जब मुकरबा चौक पर रूट बदलने को लेकर पुलिस से झड़प हुई। उसके बाद बवाल बढ़ता गया और दिल्ली में कई जगह बवाल होने के साथ ही लाल किला पर धार्मिक झंडा फहराने से आंदोलन की बदनामी शुरू हो गई। इस तरह 60 दिनों से शांति की मिसाल बना आंदोलन 60 मिनट में खराब हो गया और यह 60 मिनट ही आंदोलन पर भारी पड़ते दिखे।
किसान नेताओं ने शुरू किया डैमेज कंट्रोल
दिल्ली में बवाल व लाल किला पर झंडा फहराने से आंदोलन को लेकर गलत संदेश जा रहा है। किसान नेता अब इसके डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। किसानों को समझाया जा रहा है कि यह शरारती तत्वों ने किया है और इसमें हक के लिए लड़ाई करने वाले किसान शामिल नहीं थे। इसके साथ ही किसानों को भरोसा दिलाने का प्रयास हो रहा है कि इस तरह की घटना को दोबारा नहीं होने दिया जाएगा। अब किसान नेताओं का यह डैमेज कंट्रोल कितना होगा, यह आंदोलन की अगली रणनीति के साथ पता लग जाएगा।
हरियाणा-पंजाब को लेकर खींचतान भी दिखने लगी
पंजाब के किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल का एक वीडियो बुधवार को वायरल हुआ। इसमें वह मंच से कहते दिख रहे है कि बैठक में मुझे प्रधानी करने के लिए कहा गया लेकिन मैंने प्रधानी करने से मना कर दिया। क्योंकि मैं तभी प्रधानी करूंगा, जब हरियाणा वाले अपने युवाओं पर काबू करेंगे। उनका अपने ही युवाओं पर काबू नहीं है। दिल्ली से वापस लौटने की अपील करने के बाद पंजाब के युवा आ गए, लेकिन हरियाणा के युवा अभी तक वहां घूम रहे हैं। इस तरह का वीडियो वायरल होने के बाद खींचतान भी होती दिख रही है।