26 जनवरी को किसानों ने काफी संख्या में ट्रैक्टर पर सवार होकर दिल्ली के लिए कूच किया था। मगर इस बीच कुछ कथित किसान लालकिले पर पहुंच गए। बाद में वहां पर जो कुछ हुआ, वह पूरे देश ने देखा। हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा ने लालकिले की हिंसा से अपना पल्ला झाड़ लिया और बयान जारी किया कि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं।
गाजीपुर बॉर्डर पर भाकियू नेता राकेश टिकैत के आंसुओं ने पलटी बाजी
लालकिला प्रकरण के दो दिन बाद ही चर्चा चली कि भाकियू नेता राकेश टिकैत गिरफ्तारी दे सकते हैं मगर रात को वे मीडिया के सामने आए और सत्तापक्ष से जुड़े लोगों पर किसानों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए भावुक हो गए। उनकी आंखों से निकले आंसुओं ने काम किया और रातों-रात गाजीपुर, कुंडली और टीकरी बॉर्डर पर किसानों की संख्या बढ़ने लगी। सुबह होते-होते सभी धरनास्थल पर किसानों का जमावड़ा लग गया।
कई बार किया हाईवे जाम, टोल कराए फ्री
आंदोलन शुरू होने के बाद कई बार किसान सड़कों पर उतरकर रोष जता चुके हैं। इतना ही नहीं टोल फ्री कराकर करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा चुके हैं। उसके बावजूद आंदोलन लगातार चल ही रहा है। टोल फ्री कराने को लेकर कई बार गहमागहमी भी हो चुकी है। भीड़ कम होने के बाद टोल दोबारा शुरू कराए गए हैं।
सरकार द्वारा कोई ठोस पहल न किए जाने पर किसानों ने 22 जुलाई से जंतर-मंतर पहुंचकर समानांतर किसान संसद लगाई। रोजाना 200 किसान कुंडली बॉर्डर से बसों में सवार होकर जंतर मंतर पहुंचे और वहां किसान संसद लगाकर नए कृषि कानूनों पर चर्चा करते हुए मीडिया के अलावा देशवासियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह सिलसिला सभी कार्य दिवसों में नौ अगस्त तक चला। खासतौर पर 26 जुलाई और 9 अगस्त को महिला किसान संसद का आयोजन किया गया।
पहले से भीड़ हुई कम, दोबारा आंदोलन को तेज करने की रणनीति बना रहे
किसान आंदोलन में उतार-चढ़ाव लगातार जारी रहे। सरकार से बातचीत बंद होने से आंदोलन को लंबा होता देखकर दिल्ली की सीमाओं पर भीड़ कम होने लगी है। कुंडली बॉर्डर से किसान वापस चले गए और वहां टेंट खाली दिखाई देने लगे हैं। किसान नेता अब फिर से आंदोलन को सक्रिय बनाने में लगे हैं। फिलहाल कुंडली बॉर्डर पर करीब नौ-दस हजार किसान हैं, जिसमें महिलाओं की संख्या 300-350 के आसपास है। हरियाणा के किसानों की संख्या दिन में 800 तक पहुंच जाती है लेकिन इनमें से ज्यादातर शाम को लौट जाते हैं।