मिट्टी पर तारकोल व बजरी बिछाकर बनाई गई सड़क को जेसीबी मशीन से उखड़वाते अधिकारी। संवाद
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भदाना वाया रोहट-ककरोई मार्ग पर मिट्टी पर तारकोल व बजरी बिछाकर सड़क निर्माण करने के मामले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों ने निरीक्षण किया। उन्होंने मिट्टी पर बनाई गई सड़क उखड़वाकर दोबारा निर्माण कार्य शुरू कराया। साथ ही भाजपा नेता एवं मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन अनिल झरोठी ने भी मौके का मुआयना किया। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
पत्थर डाले बगैर मिट्टी पर सड़क निर्माण की वीडियो सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। जिसमें तीन गांवों को आपस में जोड़ने वाली सड़क को रातोंरात मिट्टी के ऊपर ही तारकोल व बजरी डालकर बनाने का मामला सामने आया था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि सड़क की गुणवत्ता इतनी निम्न स्तर की है कि हाथों से उखाड़ने पर ही सड़क उखड़ रही है। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री को करने की बात कही थी। इस पर मंगलवार को लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रशांत कुमार, उपमंडल अधिकारी जयप्रकाश गुलिया व कनिष्ठ अभियंता बलजीत पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मौके पर ठेकेदार को बुलाकर उखड़ी हुई सड़क को देखा। सड़क उखड़वाने का काम दोबारा शुरू करवा दिया गया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण के लिए दो करोड़ 54 लाख रुपये का टेंडर आवंटित किया था।
अधिकारियों का कहना है कि नए सिरे से सड़क को गुणवत्तापूर्ण तरीके से बनवाया जाएगा। दोबारा खामी मिलती है तो संबंधित के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी। मौके पर पहुंचे भाजपा नेता अनिल झरोठी ने कहा कि मामले को लेकर किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी। भ्रष्टाचार को पनपने नहीं दिया जाएगा। निर्माण कंपनी के साथ ही अगर कोई अधिकारी भी इसमें संलिप्त पाया जाता है तो उस पर भी कार्रवाई होगी। इस दौरान दीपक रोहट, राजेश, ताराचंद, सतीश, विकास, जयप्रकाश, रणबीर व हरिप्रकाश भी मौजूद रहे।
विभाग की जानकारी के बगैर ठेकेदार ने रात को मिट्टी पर सड़क का निर्माण करवा दिया। जिसे उखड़वाने का काम शुरू करवा दिया गया है। यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में हैं, जिसके तहत विभागीय कार्रवाई होनी है। अगर सड़क को तय मानकों के मुताबिक नहीं बनाया जाता है तो ठेकेदार को भुगतान नहीं किया जाएगा। -जयप्रकाश गुलिया, उपमंडल अधिकारी लोक निर्माण विभाग।