एसटीएफ सोनीपत प्रभारी सतीश देशवाल की टीम ने मामले में आरटीए चरखी दादरी कार्यालय में तैनात रहे ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर संदीप को गिरफ्तार किया है। वह फिलहाल अंबाला में नियुक्त था। इसके साथ ही बेरी, झज्जर एसडीएम कार्यालय के रजिस्ट्रेशन क्लर्क सुरेंद्र व डाटा ऑपरेटर मुकेश को गिरफ्तार किया है। तीनों को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया गया है।
ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर पर 50 हजार लेकर आरसी बनाने का आरोप
सतीश देशवाल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि रजिस्ट्रेशन के लिए कंपनी ऑनलाइन फॉर्म आरटीए कार्यालय में भेजती है। जिसके आधार पर कागजात तैयार होते हैं। आरोप है कि संदीप ने उन्हें मैन्युअली ही बना डाला। वह जाली आईडी का डाटा फीड कर भेज देता था। जिसके आधार पर रजिस्ट्रेशन बन जाता था। इतना ही नहीं लग्जरी गाड़ी का इंश्योरेंस जो दो लाख रुपये में होता है। वह भी महज कवर नोट बनाकर तैयार कर दिया जाता, जिससे दो लाख रुपये का इंश्योरेंस कराने की जरूरत नहीं होती थी।
नीलामी का बना देते थे फर्जी सेल लेटर
आरोपियों की गिरफ्तारी से पर्दा उठा है कि वह नीलामी का फर्जी सेल लेटर बना देते थे। दलाल इसके लिए कागजात तैयार करते थे। उनके पास से विभिन्न कंपनियों की जाली मोहर व अन्य बिल मिले है। जिससे वह 35 लाख रुपये की गाड़ी के जाली बिल आठ लाख तक का बना देते थे। कंपनियों को सीआरपीसी का नोटिस देकर पूछताछ की तो यह खुलासा हुआ।
आरटीए कार्यालय में नहीं मिला रिकॉर्ड
एसटीएफ ने पूछताछ के आधार पर जब कागजात की जांच को आरटीए कार्यालयों का रिकॉर्ड जांचा तो वहां से गाड़ियों से संबंधित रिकॉर्ड गायब मिला है। पूछताछ में सामने आया है कि इंश्योरेंस से लेकर रजिस्ट्रेशन तक का फर्जी रिकॉर्ड ही तैयार किया जाता था। अधिकारियों को दिखाने के लिए कुछ समय के लिए फर्जी रिकॉर्ड को रखा जाता था बाद में उसे कार्यालय से गायब कर दिया जाता था। जिससे वह पकड़ में नहीं आ सके।
बड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी एसटीएफ
मामले में इंस्पेक्टर व अन्य की गिरफ्तारी के बाद उनसे अन्य अधिकारियों की संलिप्तता का पता लगाया जाएगा। पता लगाया जाएगा कि एसडीएम व आरटीए कार्यालय से फाइल कैसे पास कर दी जाती थी। अधिकारियों को इसकी भनक किस कारण नहीं लग सकी। साथ ही आरसी बनाने के लिए आवश्यक पासवर्ड आरोपियों को किस तरह पता लगा। हालांकि इसका पूरा पता जांच के बाद ही लग सकेगा।
कागजों से होती थी छेड़छाड़
एसटीएफ प्रभारी सतीश ने बताया कि दलाल कागजात तैयार करते थे। जिस पर किसी का फोटो और किसी अन्य का पता लिख दिया जाता था। बाद में अलग-अलग कर्मी के तय पैसे उन्हें देकर कागजात बनवाए जाते थे।
अधिकारियों से भी कर सकते हैं पूछताछ
लग्जरी गाड़ियों के जाली कागजात बनाने के मामले में गहनता से जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। फिलहाल आरोपियों को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मामले से जुड़े सभी सबूत जुटाए जा रहे हैं। मामले में जिसकी भी संलिप्तता सामने आएगी उससे पूछताछ की जाएगी। -रवींद्र कुंडू, डीएसपी एसटीएफ।