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चोरी की लग्जरी गाड़ियों के जाली कागजात बनवाने के मामले में ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर समेत तीन गिरफ्तार

Wed, 28 Aug 2019 01:53 AM IST
रोहतक ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
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एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपी टीम के साथ। - फोटो : अमर उजाला
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एसटीएफ सोनीपत की टीम ने लग्जरी कार चोरी कर बेचने के लिए उनके जाली कागजात तैयार करने के आरोप में चरखी दादरी के तत्कालीन ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बेरी एसडीएम कार्यालय का रजिस्ट्रेशन क्लर्क व डाटा ऑपरेटर शामिल हैं।

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तीनों जाली कागजात तैयार करने के लिए दलालों से रकम वसूलते थे। एसटीएफ ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस मामले में अधिकारियों की संलिप्तता का भी पता लगाएगी। आरसी तैयार करने में अधिकारी के कोड का प्रयोग होता है। टीम पता लगाएगी कि कोड आरोपियों तक कैसे पहुंचे थे।

एसटीएफ डीएसपी रवींद्र कुंडू ने बताया कि एसटीएफ की टीम 23 जुलाई को देर रात को मुरथल क्षेत्र में गश्त के दौरान चोरी व लूटी गई चार लग्जरी गाड़ियों के साथ चार आरोपियों को पकड़ा था। जिनमें चरखी दादरी के गांव कोलवास का निरंजन, हिसार के गांव मय्यड़ का डॉक्टर नवनीत उर्फ सोनू, सोनीपत के गांव पिपली खेड़ा का प्रदीप उर्फ सैंडी और रोहतक के मोरखेड़ी गांव का अजय था।
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पुलिस ने उन्हें रिमांड पर लिया था। आरोपियों ने बताया था कि वह कुख्यात विकास भदाना, प्रदीप पिपली व डॉक्टर सुनील गैंग के सदस्य है। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो फॉर्च्यूनर, क्रेटा, स्कॉर्पियो, फर्जी कागजात, अवैध देशी पिस्तौल और 10 कारतूस बरामद किए थे। बाद में टीम ने पिपली के प्रदीप को गिरफ्तार कर लिया था।

10 हजार रुपये के इनामी प्रदीप की निशानदेही पर दो स्कॉर्पियो, होंडा सिटी और फॉर्च्यूनर गाड़ी को बरामद किया था। जांच में सामने आया था कि आरोपी चोरी की गाड़ियों के चेसिस नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर में फेरबदल कर बेच देते थे।

बाद में चरखी दादरी के वार्ड-2 के रहने वाले मनोज और मूलरूप से गांव पिपली फिलहाल बादली रोड बहादुरगढ़ के जयबीर को पकड़ा। दोनों चरखी दादरी अथॉरिटी में दलाल का काम करते थे। उन्होंने 14 वाहनों की रजिस्ट्रेशन कराना कुबूल किया था। उनसे काफी सामान भी बरामद किया गया था।

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एसटीएफ सोनीपत प्रभारी सतीश देशवाल की टीम ने मामले में आरटीए चरखी दादरी कार्यालय में तैनात रहे ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर संदीप को गिरफ्तार किया है। वह फिलहाल अंबाला में नियुक्त था। इसके साथ ही बेरी, झज्जर एसडीएम कार्यालय के रजिस्ट्रेशन क्लर्क सुरेंद्र व डाटा ऑपरेटर मुकेश को गिरफ्तार किया है। तीनों को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया गया है।

ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर पर 50 हजार लेकर आरसी बनाने का आरोप
सतीश देशवाल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि रजिस्ट्रेशन के लिए कंपनी ऑनलाइन फॉर्म आरटीए कार्यालय में भेजती है। जिसके आधार पर कागजात तैयार होते हैं। आरोप है कि संदीप ने उन्हें मैन्युअली ही बना डाला। वह जाली आईडी का डाटा फीड कर भेज देता था। जिसके आधार पर रजिस्ट्रेशन बन जाता था। इतना ही नहीं लग्जरी गाड़ी का इंश्योरेंस जो दो लाख रुपये में होता है। वह भी महज कवर नोट बनाकर तैयार कर दिया जाता, जिससे दो लाख रुपये का इंश्योरेंस कराने की जरूरत नहीं होती थी।

नीलामी का बना देते थे फर्जी सेल लेटर
आरोपियों की गिरफ्तारी से पर्दा उठा है कि वह नीलामी का फर्जी सेल लेटर बना देते थे। दलाल इसके लिए कागजात तैयार करते थे। उनके पास से विभिन्न कंपनियों की जाली मोहर व अन्य बिल मिले है। जिससे वह 35 लाख रुपये की गाड़ी के जाली बिल आठ लाख तक का बना देते थे। कंपनियों को सीआरपीसी का नोटिस देकर पूछताछ की तो यह खुलासा हुआ।

आरटीए कार्यालय में नहीं मिला रिकॉर्ड
एसटीएफ ने पूछताछ के आधार पर जब कागजात की जांच को आरटीए कार्यालयों का रिकॉर्ड जांचा तो वहां से गाड़ियों से संबंधित रिकॉर्ड गायब मिला है। पूछताछ में सामने आया है कि इंश्योरेंस से लेकर रजिस्ट्रेशन तक का फर्जी रिकॉर्ड ही तैयार किया जाता था। अधिकारियों को दिखाने के लिए कुछ समय के लिए फर्जी रिकॉर्ड को रखा जाता था बाद में उसे कार्यालय से गायब कर दिया जाता था। जिससे वह पकड़ में नहीं आ सके।

बड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी एसटीएफ
मामले में इंस्पेक्टर व अन्य की गिरफ्तारी के बाद उनसे अन्य अधिकारियों की संलिप्तता का पता लगाया जाएगा। पता लगाया जाएगा कि एसडीएम व आरटीए कार्यालय से फाइल कैसे पास कर दी जाती थी। अधिकारियों को इसकी भनक किस कारण नहीं लग सकी। साथ ही आरसी बनाने के लिए आवश्यक पासवर्ड आरोपियों को किस तरह पता लगा। हालांकि इसका पूरा पता जांच के बाद ही लग सकेगा।
 
कागजों से होती थी छेड़छाड़
एसटीएफ प्रभारी सतीश ने बताया कि दलाल कागजात तैयार करते थे। जिस पर किसी का फोटो और किसी अन्य का पता लिख दिया जाता था। बाद में अलग-अलग कर्मी के तय पैसे उन्हें देकर कागजात बनवाए जाते थे।

अधिकारियों से भी कर सकते हैं पूछताछ
लग्जरी गाड़ियों के जाली कागजात बनाने के मामले में गहनता से जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। फिलहाल आरोपियों को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मामले से जुड़े सभी सबूत जुटाए जा रहे हैं। मामले में जिसकी भी संलिप्तता सामने आएगी उससे पूछताछ की जाएगी। -रवींद्र कुंडू, डीएसपी एसटीएफ।
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