कृषि कानून रद्द कराने के लिए किसानों ने 26 नवंबर को नेशनल हाईवे 44 के कुंडली बॉर्डर पर डेरा डाला हुआ है। किसानों का पड़ाव कुंडली से केजीपी-केएमपी के गोल चक्कर तक है। इस तरह प्रदेश के बड़े व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल कुंडली में इसका सबसे व्यापक असर पड़ा। कुंडली के साथ नाथूपुर-सबौली का औद्योगिक क्षेत्र तीन माह तक पूरी तरह बंद रहा। वहीं राई, मुरथल व बड़ी औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियां आंशिक रूप से चलीं।
पहले तीन माह ट्रांसपोर्ट पूरी तरह बंद रहा, जिससे कच्चा माल न फैक्टरी में पहुंचा और न सामान तैयार होकर वहां से सप्लाई हुआ। उसके बाद किसानों का जमावड़ा कम हुआ तो राई, सोनीपत व बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में अन्य मार्गों से कच्चा माल आने व तैयार माल जाने लगा, लेकिन इसमें में भी उद्योगपतियों का ट्रांसपोर्ट का खर्च दो से तीन गुना बढ़ गया। कुंडली और नाथूपुर औद्योगिक क्षेत्र में उसके बाद भी वाहन नहीं जा सके। वहां करीब चार माह वाहन अंदर से घूमकर पहुंचना शुरू हुए। उसके बावजूद अभी तक भी उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के एक तरफ का रास्ता खुलवाने के आदेश से उद्योगपतियों को एक उम्मीद की किरण दिखाई है।
15 फीसदी कंपनियों में तो काम पूरी तरह ठप
जिस तरह से किसान आंदोलन लंबा चला आ रहा है, उससे फैक्टरी मालिकों की हालत खराब होती जा रही है। सबसे ज्यादा नुकसान कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में झेलना पड़ रहा है और यहां अभी तक हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। 15 फीसदी कंपनियों में तो काम पूरी तरह ठप हो गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अगर हाईवे खुलेगा तो उसका फायदा सभी को होगा। - सुभाष गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुंडली औद्योगिक एसोसिएशन
किसान आंदोलन के कारण ट्रांसपोर्ट ठप हो गया था। दो माह बाद सामान आने-जाने लगा, लेकिन काफी घूमकर आना पड़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार अब तक 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अगर कुंडली-सिंघु बॉर्डर खुला तो उद्योगपतियों को राहत मिलेगी। साथ ही राहगीरों और आसपास के लोगों की भी परेशानी दूर होगी। - राकेश देवगन, प्रधान राई औद्योगिक मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन
कुंडली बॉर्डर बंद होने से केएमपी-केजीपी से गुजर रहे वाहन
कुंडली-सिंघु बॉर्डर बंद होने के कारण दिल्ली की तरफ वाहनों का आवागमन केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल), केजीपी (कुंडली-गाजियाबाद-पलवल) एक्सप्रेस वे और ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों से हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र से आवागमन ज्यादा होने के कारण सड़कें काफी टूट गई हैं और यहां से परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जहां सोनीपत से आईएसबीटी (कश्मीरी गेट) जाने के लिए मात्र डेढ़ घंटा लगता था, अब सोनीपत से दिल्ली जाने के लिए तीन घंटे लग रहे हैं। इस तरह समय ज्यादा लगाने के कारण लोगों को अपनी जेबें भी ढीली करनी पड़ रही हैं।
यहां से हो रहा सोनीपत रोडवेज की बसों का परिचालन
सोनीपत से दिल्ली की ओर रोडवेज बसों का संचालन रोहतक रोड, कंवाली मोड़, अकबरपुर बारोटा, सफियाबाद, नरेला होते हुए किया जा रहा है। इस तरह रोडवेज बसों को 12 किमी से ज्यादा चक्कर लगाना पड़ रहा है। साथ ही टूटी सड़कों से जाने में दो से तीन गुना अधिक समय लग रहा है।
जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब की रोडवेज बसों का संचालन केजीपी एक्सप्रेस वे से यूपी के बागपत जिले के खेकड़ा से होते हुए लोनी बॉर्डर से दिल्ली किया जा रहा है। ऐसे में 20-25 किमी ज्यादा सफर तय करना पड़ रहा है। दिल्ली नजदीक होते हुए भी लोगों को सिंघु बॉर्डर बंद होने के कारण परेशानी हो रही है। इसी तरह भारी वाहनों का आवागमन भी केजीपी होते हुए लोनी बॉर्डर से हो रहा है।
कुंडली औद्योगिक क्षेत्र से माल ढुलाई पर भी पड़ रहा असर
कुंडली औद्योगिक क्षेत्र से माल ढुलाई पर भी असर पड़ रहा है। कुंडली के अलावा नाथुपुर, सबौली के पास बसे औद्योगिक क्षेत्र में माल ढुलाई देरी से हो रही है। कुंडली औद्योगिक क्षेत्र से माल ढुलाई छोटे वाहनों से हो रही रही है।
हाईवे खुला तो होगा काफी फायदा
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से याचिका पर हाईवे खोलने के आदेश आने के बाद अब हाईवे खुला तो लोगों को काफी फायदा होगा। कुंडली से सटे गांवों के साथ ही सोनीपत जिले के अन्य गांवों के लोगों को दिल्ली में आवागमन में आसानी होगी।