शहर में सौंदर्यीकरण के नाम पर निगम अफसर व ठेकेदार मिलकर खेल करने में लगे हैं। शहर में 27 लाख रुपये से लगाए गए खजूर के पेड़ अब सूखकर गिरने भी शुरू हो गए हैं, लेकिन उसके बाद भी निगम उन पेड़ों के हरे होने का इंतजार कर रहा है और इतना कुछ होते हुए भी ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड नहीं किया जा रहा है। उसे सभी खामियां छुपाने का पूरा मौका दिया जा रहा है, जबकि उन पेड़ को लगाए हुए चार महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। इस तरह शहर में सूखे पेड़ो से सुंदरता बढ़ने की जगह कम हो गई है और उन पेड़ के गिरने से हादसा होने का डर बना हुआ है। वहीं, अधिकारी अपनी फजीहत से बचने के लिए ठेकेदार को केवल नोटिस देकर खानापूर्ति कर रहे हैं और इस बार फिर ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया गया है, जिसमें उन खजूर के पेड़ों को जल्द हरे करने के लिए कहा गया है।
पाम की जगह खजूर के बड़े पेड़ लगाए
नगर निगम अधिकारियों व ठेकेदार के बीच पेड़ लगाने का यह खेल वर्ष 2016 में शुरू हो गया था। निगम की ओर से 27 लाख रुपये का ठेका छोड़ा गया, जिसमें शहर के सौंदर्यीकरण के लिए सेक्टरों की सड़क के डिवाइडर व बहालगढ़ रोड के डिवाइडर पर पाम के छोटे पेड़ लगाने थे। सबसे पहले सेक्टर 23 की डिवाइडर रोड पर खजूर के बड़े पेड़ लगाकर गड्ढों में गाड़ दिए गए। उसके बाद सेक्टर 14-15 की डिवाइडर रोड पर ऐसे ही बड़े पेड़ गाड़े गए। बहालगढ़ रोड पर पाम के पेड़ लगाए गए, लेकिन वह भी बड़े पेड़ लगाए गए। मुरथल रोड पर जरूर पाम के छोटे पेड़ लगाए गए, लेकिन वे उस रोड पर स्थित एक कंपनी के रहमोकरम से लगवाए गए। जिन पेड़ों को निगम के ठेकेदार ने लगवाया है, वह कुछ दिनों बाद ही सूखने शुरू हो गए थे। अब यह गिरने शुरू हो गए हैं। सेक्टर 23 के डिवाइडर पर लगे कई पेड़ तेज हवा के कारण गिर गए और उनको वहां से तुरंत हटा लिया गया। बड़ा सवाल यह है कि जब पेड़ सूखकर गिरने लगे हैं तो निगम को उनके लगाए जाने के चार महीने बाद भी हरे होने का इंतजार क्यों है।
ठेकेदार को नोटिस देकर खानापूर्ति
नगर निगम के अधिकारी ही इस पूरे मामले में पेड़ लगाने वाले ठेकेदार को बचा रहे है। जिस समय ठेका छोड़ा गया था, उसी समय बड़ा खेल करने की तैयारी कर दी गई थी। ठेकेदार को पहले ही दो साल का समय दिया गया कि वह पेड़ दो साल में हरे कर सकता है, जबकि बड़े पेड़ की जगह छोटे लगाए जाते तो दो साल में वह हरे ही नहीं, बल्कि काफी बड़े होकर शहर की सुंदरता को बढ़ाते। अब ठेकेदार को केवल नोटिस जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि वह पेड़ों को जल्द से जल्द हरा करे। पेड़ हरे होने के बाद ही उसका पेमेंट किया जाएगा। जबकि जिस तरह से पेड़ सूखकर गिरने लगे हैं, उस हालत में ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड किया जाना चाहिए था।
वर्जन
ठेकेदार को पेड़ हरे करने के लिए दो साल का समय दिया गया है। वहीं, उसको पेड़ों की हालत को देखते हुए अभी नोटिस दिया गया है, जिसमें जल्द से जल्द उनको बेहतर करने के लिए कहा गया है। उसे यह भी कहा गया है कि पेड़ हरे होने पर ही पेमेंट दी जाएगी।
-रोहताश बिश्नोई, डिप्टी कमिश्नर नगर निगम