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बहन की बीमारी का पर्चा दिखाया तो किसान बोले - क्या आज ही सभी बीमार होंगे

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अंकित चौहान
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सोनीपत। संयुक्त किसान मोर्चा के भारत बंद के आह्वान पर कुंडली बॉर्डर पर बैठे किसानों ने केजीपी-केएमपी गोल चक्कर के साथ ही नेशनल हाईवे-44 पर जाम लगा रखा था। जाम के दौरान दिनभर किसानों और राहगीरों के बीच नोकझोंक व हाथापाई तक होती रही। संयुक्त किसान मोर्चा की अपील के बावजूद किसानों ने मरीज को लेकर जा रहे निजी वाहनों को जाम से नहीं निकलने दिया। इस दौरान युवक ने हाथ जोड़ आगे जाने की बात कही, लेकिन किसान नहीं माने। इसके बाद उसने अपनी बहन की बीमारी का पर्चा दिखाया तो किसानों ने कहा कि क्या आज ही सभी बीमार होंगे। हालांकि एंबुलेंस को कहीं नहीं रोका गया।
संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत बंद के साथ ही किसानों से अपील करते हुए कहा था कि एंबुलेंस समेत अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहनों को नहीं रोका जाएगा। ऐसे में किसानों ने एंबुलेंस को जरूर जाने दिया, लेकिन किसी बीमार को निजी वाहन में लेकर जा रहे परिजनों को रोक दिया गया। इस दौरान नोकझोंक से लेकर अभद्रता तक की गई। सोनीपत के रहने वाले हितेश की बहन काफी समय से बीमार है और उनका ग्रेटर नोएडा के अस्पताल में नियमित उपचार चल रहा है। उनकी बहन का ऑपरेशन करने के लिए चिकित्सक ने 26 मार्च का समय दिया था। वह केजीपी पर जाने लगे तो उनको किसानों ने रोक दिया। उन्होंने अपनी बहन की बीमारी का पर्चा दिखाया तो किसानों ने उसके बाद भी आगे नहीं जाने दिया। उसने हाथ जोड़े तो किसानों ने कहा कि पहले ही कई बीमार बताकर निकल गए हैं और क्या सभी आज ही बीमार होंगे।
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इसके अलावा दिल्ली के रहने वाले प्रीतम सिंह अपने परिवार के साथ किसी काम से पंजाब गए थे और वहां से शुक्रवार सुबह ही वापस दिल्ली के लिए निकले थे। वह किसी तरह केएमपी-केजीपी गोल चक्कर तक पहुंच गए, लेकिन यहां आकर परिवार के साथ अभद्रता की गई। किसानों से केजीपी पर ऊपर चढ़ने देने के लिए गुहार लगाई तो वहां कुछ किसान गाली-गलौज तक करने लगे। हालांकि उन किसानों को अन्य ने ऐसा नहीं करने की नसीहत दी।
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