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एनएचएआई के 3198 करोड़ से बन रहे नेशनल हाईवे 44 व 334बी की मजदूरों के पलायन से रफ्तार थमी, 899 करोड़ का प्रोजेक्ट लटका

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नेशनल हाईवे 44 का अधूरा पड़ा निर्माण कार्य - फोटो : Sonipat
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अंकित चौहान
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सोनीपत। सरकार के बड़े प्रोजेक्ट जहां पहले लॉकडाउन के कारण बंद हो गए थे, वहीं अब प्रवासी मजदूरों के अपने प्रदेश लौटने से इसका असर उन प्रोजेक्ट पर पड़ने लगा है। जहां एनएचएआई के 3198 करोड़ रुपये से बन रहे नेशनल हाईवे 44 व 334बी की मजदूरों के अपने प्रदेशों को लौटने के कारण रफ्तार थम गई है, वहीं 899 करोड़ रुपये का नेशनल हाईवे 352 शुरू तक नहीं हो सका है। क्योंकि अकेले नेशनल हाईवे 44 व 334बी पर लगभग 900 मजदूरों की जरूरत है और इनपर केवल 200 मजदूरों के सहारे काम शुरू कराया गया है। मजदूरों का नहीं मिलना अब सबसे बड़ी परेशानी हो गई है। हालांकि एनएचएआई के अधिकारियों को उम्मीद है कि मजदूर जल्द ही वापस लौटेंगे और उसके बाद सभी प्रोजेक्ट का निर्माण रफ्तार पकड़ेगा। इनमें से नेशनल हाईवे 44 का दिल्ली से पानीपत तक का चौड़ीकरण काफी समय से लंबित पड़ा है, जिसकी अब पूरा होने की उम्मीद जगी थी तो अब मजदूरों के पलायन ने इस उम्मीद को लंबा कर दिया है।
एनएच 44 के 2178 करोड़ के प्रोजेक्ट पर 500 की जगह केवल 100 मजदूर लगे
नेशनल हाईवे 44 की मुख्य सड़क को छह लेन से आठ लेन बनवाने के साथ ही दोनों ओर दो-दो लेन की सर्विस रोड बनवाने के लिए एनएचएआई ने वर्ष 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी से शिलान्यास कराया था। एनएचएआई के अधिकारियों ने शिलान्यास कराने के बाद एस्सल ग्रुप की मेसर्स मुकरबा चौक पानीपत टोल रोड लिमिटेड कंपनी को निर्माण का जिम्मा सौंप दिया था। कंपनी बिल्ड आपरेशन एंड ट्रांसफर मोड (बीओटी) के आधार पर 2178.72 करोड़ रुपये खर्च करने थे, जिससे निर्माण अवधि से लेकर 17 साल तक कंपनी को टोल वसूलना था। लेकिन कंपनी ने डेढ़ साल पहले काम बंद कर दिया, जबकि अप्रैल 2019 तक इसका निर्माण पूरा होना था। उसके बावजूद अभी तक 30 प्रतिशत काम हो सका है। अब इसका ठेका मुंबई की कंपनी वेल्सपन को दिया है और उसने काम भी शुरू करा दिया। लेकिन अब सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हो गई है कि निर्माण के लिए मजदूर नहीं मिल रहे है और इस नेशनल हाईवे पर 500 मजदूर काम करने थे, जिनकी जगह केवल 100 मजदूर लगे हुए है। मजदूरों के अपने घरों को चले जाने से यह निर्माण लंबा खिंचता दिख रहा है।
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एनएच 334बी के 1020 करोड़ के प्रोजेक्ट पर 400 की जगह 100 मजदूर लगे
सरकार ने कई साल पहले यूपी के मेरठ से सोनीपत होते हुए राजस्थान बॉर्डर के लोहारू तक सड़क को नेशनल हाईवे 334बी घोषित किया था, जिसे चार लेन बनाने का काम शुरू हो गया है। इसका यूपी के बागपत बॉर्डर से रोहतक बॉर्डर तक के हिस्से पर 1020 करोड़ रुपये खर्च होने है और इसका काम दो महीने पहले तक बड़ी तेजी से चल रहा था। लॉकडाउन में काम बंद हुआ तो अब दोबारा से शुरू किया गया, लेकिन मजदूरों के पलायन ने इस काम की रफ्तार भी रोक डाली। क्योंकि इसपर लगभग 400 मजदूर काम करते थे और अब केवल 100 मजदूर काम कर रहे है, जिनमें अधिकतर मशीन पर काम करने वाले है। इस तरह से यह भी मजदूरों की कमी के कारण लटकता दिख रहा है।
मुरथल से बरौदा तक 899 करोड़ के एनएच 352 का काम शुरू नहीं हो सका
एनएचएआई को मुरथल से बरौदा तक 899 करोड़ से नेशनल हाईवे 352 का निर्माण शुरू करना था। जिसको लॉकडाउन से पहले शुरू करना था, लेकिन लॉकडाउन के कारण उसे शुरू नहीं किया जा सका। अब निर्माण कार्य शुरू हुए तो एनएचएआई ने काम शुरू कराने की तैयारी की, लेकिन पहले ही दो प्रोजेक्ट पर मजदूर कम काम कर रहे है और इस नए एनएच के लिए मजदूर तलाश करना बड़ी चुनौती बन गई। इस कारण ही इसपर काम ही शुरू नहीं हो सका है।
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नेशनल हाईवे 44 व 334बी पर काम शुरू कराया गया है, लेकिन ठेका कंपनी को मजदूर नहीं मिल रहे है। मजदूरों के पलायन करने के कारण काफी समस्या खड़ी हो गई है। लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति सामान्य होगी और नेशनल हाईवे के निर्माण में रफ्तार आएगी। नेशनल हाईवे 352 का निर्माण भी तभी शुरू किया जा सकेगा।
-आनंद दहिया, टेक्निकल मैनेजर एनएचएआई
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