सोनीपत। दिल्ली-पानीपत-करनाल रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ सकेगी। केंद्र सरकार के साथ दिल्ली और हरियाणा सरकार के सहयोग से इस परियोजना को पूरा किया जाना है। इस हाईस्पीड कॉरिडोर से सोनीपत को दिल्ली और करनाल से जोडऩे के साथ-साथ औद्योगिक और शैक्षिक केंद्रों को भी विस्तार मिलेगा।
आरआरटीएस परियोजना के तहत 136 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में 21 स्टेशन होंगे। इसमें सोनीपत के कई प्रमुख स्टेशन शामिल होंगे। इससे दिल्ली के साथ पानीपत व करनाल से सोनीपत की कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। वर्तमान में केंद्र व हरियाणा के बाद अब दिल्ली में भी भाजपा की सरकार बनने जा रही है तो यह परियोजना जल्द धरातल पर उतर सकेगी।
सराय काले खां से करनाल के नए आईएसबीटी तक बनेगा कॉरिडोर
136 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से करनाल के नए आईएसबीटी तक जाएगा। यह यात्रा के समय को आधा कर देगा। इससे दिल्ली से करनाल का सफर तीन घंटे से घटकर महज डेढ़ घंटे में पूरा हो सकेगा। हाई स्पीड कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली से सोनीपत का सफर महज आधा घंटा में पूरा होगा। वर्तमान में सड़क मार्ग से करीब एक से सवा घंटा लगता है। इससे हजारों दैनिक यात्रियों को राहत मिलेगी।
उद्योग के साथ शिक्षण संस्थानों को मिलेगा फायदा
परियोजना से सोनीपत के कुंडली, राई व बड़ी औद्योगिक क्षेत्र को फायदा होगा। साथ ही राई स्थित राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में खुले शिक्षण संस्थानों को भी खूब फायदा होगा। बेहतर परिवहन सुविधा मिलने से व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। सोनीपत में फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल उद्योगों को फायदा मिलेगा। छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए यह कॉरिडोर वरदान साबित होगा। एनसीआर में आरआरटीएस परियोजना नया ट्रांसपोर्ट हब बन सकेगा। दिल्ली से करनाल तक पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।