गांव हलालपुर स्थित सुशील कुमार कुश्ती अकादमी में महिला पहलवान निशा व उसके भाई सूरज की हत्या करने के आरोपियों की गिरफ्तारी से ग्रामीणों को कुछ राहत मिली है। हालांकि गांव के दो बच्चों को खोने के बाद से उनका गुस्सा अभी कम नहीं हुआ है। वह आरोपियों को कड़ी सजा दिए जाने के पक्ष में हैं।
गांव हलालपुर के ग्रामीणों की जुबान पर गुरु और शिष्या के रिश्ते को लेकर चर्चा है। उनका कहना है कि एक गुरु हमेशा ही यह चाहता है कि उसके शिष्य आगे बढ़ें और अपना व खुद उसका नाम रोशन करें, लेकिन एक गुरु ही जब शिष्या की जान ले ले तो वह गुरु कहलाने के लायक नहीं रहता। ग्रामीणों का कहना है कि कुश्ती कोच होने के साथ ही पवन गांव का दामाद था। उसके मान-सम्मान में गांव के लोग कोई कसर नहीं छोड़ते थे, लेकिन जिस प्रकार से उसने वारदात को अंजाम दिया है, वह गुरु ही नहीं, बल्कि इंसानियत के रिश्ते को भी शर्मसार करने वाला है।
मुख्य आरोपी पवन व उसके साथ सचिन की दिल्ली में गिरफ्तारी के बाद खरखौदा थाना प्रभारी कर्मजीत व सीआईए प्रभारी योगेंद्र की टीम आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लेने दिल्ली की कोर्ट में गई हुई है।
अन्य आरोपियों की जानकारी जुटा रही पुलिस
पुलिस की तरफ से चार आरोपियों को पकड़ लिया है, वहीं अन्य की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही गांव के बाहरी छोर पर स्थित अकादमी पर भी पुलिस नजर बनाए हुए है। अकादमी के जलाए जाने के बाद से पुलिस वहां तैनात है।
पहलवान निशा के पिता दयानंद को इस बात का भी अफसोस है कि बेटी को जिस प्रकार से आरोपी तंग करता था, उसके बारे में उन्हें वारदात के बाद घर पहुंचने पर पता चला। दयानंद का कहना है कि उनकी पत्नी ने उन्हें जानकारी नहीं दी, यह गलती रह गई। उनका कहना है कि अगर उन्हें पहले इस बात का पता चल जाता तो वह जरूर इसको लेकर ठोस कदम उठाते, जिससे उनके बच्चों की जान बच जाती।