सोनीपत। प्रथम विश्व योगासन खेल चैंपियनशिप-2026 में सोनीपत की गुरु-शिष्या जोड़ी ने इतिहास रच दिया। 78 से अधिक देशों और 600 से ज्यादा खिलाड़ियों की मौजूदगी वाली प्रतियोगिता में योगासन खिलाड़ी एवं कोच सृष्टि दहिया (18) और उनकी शिष्या देवांशी (14) ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का परचम विश्व मंच पर लहरा दिया। एक ही पोडियम पर गुरु और शिष्या का स्वर्णिम प्रदर्शन योगासन जगत में प्रेरणा की नई मिसाल बन गया।
प्रथम विश्व योगासन खेल चैंपियनशिप-2026 में मिली इस उपलब्धि ने सोनीपत ही नहीं पूरे देश को गौरवान्वित किया है। जिस गुरु ने अपनी शिष्या को विश्व स्तर तक पहुंचाने के लिए वर्षों तक मेहनत की वही स्वयं भी विश्व चैंपियन बनीं।
सोनीपत की सृष्टि दहिया पिछले नौ वर्षों से योगासन की साधना कर रही हैं। विश्व मंच पर तिरंगे के साथ खड़े होकर राष्ट्रगान सुनना उनका सपना था, जो अब साकार हो गया है। अपने खेल जीवन में 120 से अधिक पदक जीत चुकी सृष्टि के लिए यह विश्व स्वर्ण सबसे बड़ी उपलब्धि है। अनुशासन, निरंतर अभ्यास और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी अलग पहचान बनाई है। वह तीन बार खेलो इंडिया प्रतियोगिता में भाग ले चुकी हैं और राष्ट्रीय स्तर पर 30 से अधिक पदक जीत चुकी हैं।
सृष्टि की इस उपलब्धि पर उनके पिता रविंद्र दहिया, माता सरोज दहिया और भाई हर्षित दहिया सहित पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग के साथ-साथ योगासन भारत, विश्व योगासन महासंघ के महासचिव डॉ. जयदीप आर्य और हरियाणा राज्य योगासन संघ के सचिव युद्धवीर के मार्गदर्शन को दिया।
दूसरी ओर ब्राइट स्कूल की छात्रा देवांशी ने महज दो वर्ष के अभ्यास में विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर सबको चौंका दिया। कम उम्र और सीमित अनुभव के बावजूद उनकी मेहनत, समर्पण और लगन ने उन्हें विश्व के सर्वोच्च मंच तक पहुंचाया। देवांशी अपनी कोच सृष्टि दहिया और सरोज दहिया के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं। इतनी कम आयु में विश्व स्वर्ण पदक जीतना उनकी असाधारण प्रतिभा और अथक परिश्रम का प्रमाण माना जा रहा है।
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सिर्फ पदक नहीं, सपनों की जीत भी
विश्व चैंपियनशिप में मिली यह सफलता केवल दो खिलाड़ियों की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय योगासन की बढ़ती वैश्विक पहचान का भी प्रतीक है। गुरु और शिष्या की यह जोड़ी उन हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस रखते हैं