सोनीपत। कोख में बेटियों के कत्ल के लिए बदनाम हरियाणा का एक गांव ऐसा भी है, जहां बेटियां पैदा होने पर जश्न मनाया जाता है। आठ हजार की आबादी वाले गोरड़ गांव में लगभग हर घर में बेटी है। यह बदलाव गांव की बेटियों से ही आया है। यहां की बेटियां आज सिर्फ घर की शान नहीं बल्कि पूरे समाज की प्रेरणा बन चुकी हैं, चाहे वह ईपीएफओ में कमिश्नर मंजू हों, नेशनल कबड्डी खिलाड़ी साक्षी और अंजलि हों या बॉक्सर रिद्धिमा। करीब 30 बेटियां दिल्ली और हरियाणा पुलिस में सेवाएं देकर गांव का नाम रोशन कर रही हैं।
सोनीपत शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर बसे खरखौदा ब्लॉक के गोरड़ गांव ने बेहतर लिंगानुपात के मामले में पूरे प्रदेश के लिए नजीर पेश की है। साल 2025 में यहां प्रति 1000 बेटों पर रिकॉर्ड 1786 बेटियां जन्मी हैं। बेहतर लिंगानुपात पर स्वास्थ्य विभाग ने गोरड़ गांव का बेस्ट विलेज पुरस्कार के लिए चयन किया है।
पीसी-पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. नितिन फलस्वाल ने बताया कि साल 2025 में गांव में 28 बेटों और 50 बेटियों ने जन्म लिया था। अब गांव का लिंगानुपात 1786 दर्ज किया गया है। इससे पहले गोरड़ वर्ष 2021 में 34 बेटों और 50 बेटियों ने जन्म लिया था। तब गांव का लिंगानुपात 1470 था।
गांव को दोबारा पुरस्कार मिलने की खबर से खुशी का माहौल है। महिलाओं का कहना है कि पुराने जमाने में लड़कियों की कद्र नहीं होती थी। आज बेटियों के जन्म पर खुशी मनाई जाती है। सरपंच अंजू तोमर बताती हैं, गांव की अधिकतर बेटियां सरकारी पदों पर आसीन हैं। यहां की बेटियां नेशनल स्तर के खेलों में अपना लोहा मनवा चुकी हैं। संवाद
बेस्ट विलेज पुरस्कार योजना में चयन का मापदंड
डॉ. नितिन फलस्वाल ने बताया कि जनवरी से दिसंबर तक गांव के लिंगानुपात की जानकारी जुटाई जाती है। योजना के तहत 5000 से ज्यादा आबादी वाले गांवों की संस्थागत डिलीवरी 30 फीसदी होनी जरूरी है। वहीं, गांव में दसवीं कक्षा का विद्यालय भी होना अनिवार्य है।
सोनीपत जिले के इन गांवों में भी है बेहतर लिंगानुपात
साल 2024 में जिले का बढ़खालसा गांव टाॅप पर रहा था। पिछले साल भिगान गांव में 1000 बेटों पर 1486 बेटियां जन्मी थीं। भिगान गांव में साल 2024 में 52 बेटियों व 35 बेटों ने जन्म लिया था। वहीं, गांव बढ़खालसा में 1000 बेटों पर 1700 बेटियाें ने जन्म लिया था। साल 2023 में गांव हलालपुर और साल 2022 में गांव रसोई का लिंगानुपात बेहतर रहा था। वर्ष 2021 में गोरड़ गांव का लिंगानुपात 1470 था।
............
बेहतर लिंगानुपात पर क्या बोलीं महिलाएं-
-हमारे घर में बेटा-बेटी कोएक समान माना जाता है। बेटे की जन्म की तरह ही बेटी के जन्म पर भी जश्न मनाया जाता है। मेरे दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा भव्य है तो छोटी बेटी मन्नत है। दोनों में कोई फर्क नहीं है।
-ज्योति, बहू।
...........-मेरी एक साल की बेटी प्रियांशी है। हमारे घर में बेटी और बहू को लक्ष्मी का रूप माना जाता है। बेटी के जन्म पर जश्न मनाया गया था। उसके पहले जन्मदिन को भी जश्न मनाया गया।
- निशा, बहू।
............
-गांव में लिंगानुपात में सुधार आया है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग का भी योगदान रहा है। यहां की बेटियां खेलों के साथ सरकारी पदाें पर भी आसीन हो रही हैं।
-सुरेखा, आंगनबाड़ी वर्कर।
...........
-गांव में कोई लिंग जांच नहीं कराई जाती है। आशा वर्करों के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है। बेस्ट विलेज अवाॅर्ड के लिए गांव का दोबारा चयन होना खुशी की बात है।
-शर्मिला, एएनएम।
............
-गांव का बेहतर लिंगानुपात आना आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से संभव हुआ है। गर्भ में बेटियों को बचाने के लिए गर्भवती व परिवार की महिलाओं के साथ बैठकें की जाती हैं। साथ ही उनकी समय-समय पर एएनसी जांच भी कराई जाती है।
-प्रमिला, आशा वर्कर।
............
-आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ ग्रामीणों के सहयोग से गांव का लिंगानुपात सर्वश्रेष्ठ हुआ है। गांव में खुशी का माहौल है कि लिंगानुपात के मामले में दोबारा गांव को पांच साल बाद फिर बेस्ट विलेज अवाॅर्ड मिलने जा रहा है।
-अंजू तोमर, सरपंच, गांव गोरड़।
...........
-बेटियां परिवार व समाज का मान-सम्मान होती हैं। समाज में इनका स्थान गौरवमयी है। बेटियों से घर का आंगन चहकता है। उनके विकास के बिना सभ्य समाज की कल्पना नहीं कर सकते। गोरड़ ने ऐसी मिसाल कायम की है। यहां का लिंगानुपात एक बार फिर सर्वश्रेष्ठ रहा है।
-डॉ. ज्योत्सना, सिविल सर्जन
..............
जानें...किस वर्ष कैसा रहा सोनीपत जिले का लिंगानुपात
वर्ष - लिंगानुपात
2014 - 830
2015 - 867
2016 - 902
2017 - 937
2018 - 950
2019 - 909
2020 - 917
2021 - 888
2022 - 898
2023 - 894
2024 - 901
2025 - 894
फोटो : शर्मिला
फोटो : शर्मिला
फोटो : शर्मिला
फोटो : शर्मिला
फोटो : शर्मिला