सोनीपत। गोहाना को जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। ऐतिहासिक, भौगोलिक और शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह क्षेत्र अब हरियाणा के प्रशासनिक नक्शे पर एक सशक्त इकाई के रूप में उभर रहा है। वर्ष 1826 में तहसील के रूप में स्थापित गोहाना अब शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है जिससे जिले का दर्जा मिलने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं।
गोहाना शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर भारत का अग्रणी केंद्र बन चुका है। अंग्रेजों के शासनकाल में शहीद भगत फूल सिंह ने 23 मार्च 1920 को गांव भैंसवाल कलां में गुरुकुल की नींव रखी थी। इसके बाद उन्होंने 1936 में खानपुर कलां में कन्या गुरुकुल की स्थापना की जो आज उत्तर भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय बन चुका है। इसके साथ ही खानपुर कलां में उत्तर भारत का पहला महिला मेडिकल कॉलेज संचालित है जो महिलाओं को चिकित्सा शिक्षा में नई पहचान दे रहा है।
परिवहन और कनेक्टिविटी में अग्रणी
गोहाना न केवल शिक्षा बल्कि परिवहन नेटवर्क के लिहाज से भी अत्यंत सशक्त केंद्र है। यह रोहतक-गोहाना-पानीपत रेल मार्ग से अंग्रेजों के समय से जुड़ा हुआ है जबकि जींद-गोहाना-सोनीपत रेल सेवा भी भाजपा सरकार के शासनकाल में वर्ष 2016 में शुरू की गई थी। इसके साथ ही गोहाना से नेशनल हाईवे 709 (पानीपत-गोहाना-रोहतक) गुजरता है जबकि कटरा हाईवे और एनएच-352ए सोनीपत को गोहाना होते हुए जींद से जोड़ते हैं। इन सड़कों के पूर्ण होने से यह क्षेत्र राज्य के प्रमुख यातायात जंक्शन के रूप में स्थापित हो चुका है।
नौ शहरों के केंद्र में स्थित
गोहाना की भौगोलिक स्थिति इसे विशिष्ट बनाती है। यह नौ प्रमुख शहरों सोनीपत, रोहतक, खरखौदा, जींद, सफीदों, पानीपत, महम, गन्नौर और जुलाना के मध्य बसा हुआ है। सभी शहरों की औसत दूरी 30 से 40 किलोमीटर के भीतर है जिससे गोहाना प्रशासनिक दृष्टि से एक स्वाभाविक जिला मुख्यालय बन सकता है।
संघर्ष से उम्मीद की ओर
करीब दो दशक पहले गठित जिला बनाओ संघर्ष समिति ने गोहाना को जिला घोषित करने की मांग को कई बार आंदोलन किया है। राजनीतिक मंचों से भी यह मुद्दा लगातार गूंजता रहा है। अब जब क्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और प्रशासनिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बन चुका है तो जनता को उम्मीद है कि गोहाना जल्द ही हरियाणा के नए जिले के रूप में मानचित्र पर दर्ज होगा।
गोहाना के जिला बनने में सहायक बिंदु
-शैक्षणिक केंद्र : यहां उत्तर भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय और महिला मेडिकल कॉलेज है।
बेहतर कनेक्टिविटी : रेल और नेशनल हाईवे नेटवर्क से हर दिशा में सुगम संपर्क है।
भौगोलिक संतुलन : नौ प्रमुख शहरों के केंद्र में। प्रशासनिक दृष्टि से उपयुक्त स्थान।
जन आंदोलन : दो दशक से जिला बनाओ समिति प्रयासरत है।