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बेटियां नहीं किसी से कम, फिर भी लिंगानुपात में पिछड़े हम

Thu, 06 Oct 2016 12:57 AM IST
नितिन आंतिल/ अमर उजाला, सोनीपत
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ - फोटो : sonipat
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बेटियां किसी से कम नहीं हैं। कई बार गांव की लड़कियों ने यह साबित भी किया है, लेकिन लिंगानुपात में लगातार दो साल शहरों को मात देने वाले गांव साल 2016 के पहले आठ माह में पिछड़ गए हैं। जिले में आज गांवों में जहां एक हजार लड़कों के मुकाबले 880 लड़कियां हैं, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 908 तक है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी तीन साल के आंकड़ों के अध्ययन से यह खुलासा हुआ है।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, दो साल पहले प्रदेश में लिंगानुपात की चिंताजनक स्थिति थी। खासकर रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी, झज्जर, अंबाला, कुरुक्षेत्र, सोनीपत, रोहतक, करनाल, कैथल, पानीपत और यमुनानगर थे। इन जिलों में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान जोरदार ढंग से लागू करने का प्रयास किया गया, लेकिन अभियान का असर शहरों के मुकाबले गांवों में कम रहा है। 2014 में जिले का लिंगानुपात एक हजार लड़कों के पीछे 830 लड़कियों का था, जो 2015 में बढ़कर 867 हो गया। साल 2016 में अगस्त तक आंकड़ा 892 आ गया है।

2016 में आकर पिछड़ गए म्हारे गांव
अर्बन व रूरल की तुलना की जाए तो चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। दो साल पहले 2014 में ग्रामीण एरिया में लिंगानुपात 862 था, जबकि अर्बन एरिया का 813 था। 2015 में भी ग्रामीण एरिया अर्बन एरिया से आगे रहे। इस साल गांव का आंकड़ा 886 के था, जबकि शहर का लिंगानुपात 845 रहा, लेकिन 2016 में आंकड़े उलट हो गए हैं। जनवरी से अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में लिंगानुपात 908 पर आ गया है, लेकिन गांवों में लिंगानुपात 880 तक ही पहुंचा है।
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शहरी लोगों की सोच बदली या दबाव का असर 
जिले के सोनीपत, गोहाना, गन्नौर व खरखौदा में लिंगानुपात लगातार सुधर रहा है। साल 2014 व 15 में औसतन गांवों के मुकाबले शहरों में कम लड़कियां थीं, लेकिन 2016 के पहले आठ माह में शहर गांवों से आगे निकल गए हैं। विभाग ने 2014 में भ्रूण लिंग जांच को लेकर छह जगह छापामारी की, जबकि 2015 में 10 और 2016 में अब तक 16 जगह दबिश दी जा चुकी है। इतना ही नहीं पानीपत, करनाल के साथ-साथ दिल्ली व यूपी में भी छापामारी कर भ्रूण लिंग जांच और गर्भपात कराने के बड़े रैकेटों का भंड़ाफोड़ किया गया। 
 
समय के साथ लोगों की सोच भी बदल रही
समय के साथ लोगों की सोच में भी बदलाव आ रहा है। शहर के साथ गांवों में भी लिंगानुपात में सुधार हुआ है। शिक्षा के कारण भी लड़कियों के प्रति सोच में बदलाव आया है। लड़कियों को लड़कों के बराबर माना जाने लगा है। लड़कियों ने देश के लिए ओलंपिक में भी मेडल जीते हैं। लड़कियां किसी भी क्षेत्र में आज लड़कों से पीछे नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में और ज्यादा प्रयास करने की आवश्यकता है।
ज्योति जुनेजा, जीवीएम गर्ल्स कॉलेज, प्राचार्या 

शहरों के साथ-साथ गांवों में भी लिंगानुपात में सुधार हुआ है। 2014 में जहां जिले का औसतन लिंगानुपात 830 था, वह अब 892 पर आ गया है। गांवों की अपेक्षा शहरों में तेजी से सुधार का अहम कारण यह भी है कि जिले में 74 अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं, जिनमें से चार सरकारी हैं। इसमें अर्बन एरिया में 60 और रूरल एरिया में मात्र 14 है। विभाग ने लगातार अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी की और छापामारी भी की। इससे जिले में तेजी से लिंगानुपात में सुधार हुआ।
जेएस पूनिया, सीएमओ 

सोनीपत सिटी में सबसे ज्यादा असर
जिले के अर्बन एरिया में तुलना की जाए तो सोनीपत सिटी में सबसे ज्यादा सुधार हुआ है। सिटी में लिंगानुपात 909 पर पहुंच गया है, जबकि गोहाना में 892, गन्नौर में 886 व खरखौदा में 882 पर है। हालांकि, ग्रामीण एरिया के औसतन लिंगानुपात 880 से गन्नौर और खरखौदा थोड़ा सा ही आगे हैं।
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