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करनाल जाने की तैयारी में खानपुर मेडिकल कॉलेज के एक दर्जन डाक्टर

Tue, 04 Oct 2016 01:05 AM IST
देवेंद्र सैनी/ अमर उजाला, गोहाना
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डाक्टर
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भगत फूलसिंह महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां मेें नियुक्त चिकित्सकों को ग्रामीण क्षेत्र में नौकरी करने के नाम पर आठ से 20 हजार रुपये प्रतिमाह अधिक वेतन दिया जा रहा है, इसके बावजूद यहां नियुक्त चिकित्सक काम करके खुश नहीं हैं। यहां से लगभग एक दर्जन डॉक्टर तब्दील होकर करनाल के कल्पना चावला अस्पताल में जाने की तैयारी कर रहे हैं। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का ड्रीम प्रोजेक्ट कहलाने वाला भगत फूलसिंह महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां हमेशा चर्चा में रहता है। पहले यहां भर्तियों व खरीददारी को लेकर विवाद उठा तो अब डॉक्टरों के यहां से नौकरी छोड़कर जाने की चर्चा है। यहां रोजाना करीब दो हजार लोग इलाज के लिए आ रहे हैं। चिकनगुनिया व डेंगू के प्रकोप के बीच करीब एक दर्जन डॉक्टरों के जाने से यहां हालात बिगड़ सकते हैं। 

मेडिकल कॉलेज से नौकरी छोड़कर करनाल जाने की तैयारी में लगे एक चिकित्सक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यहां का माहौल नौकरी के लिए सही नहीं है। इसलिए उसके समेत लगभग एक दर्जन डॉक्टर करनाल जाने की तैयारी में हैं। कारण, यहां नए चिकित्सकों की भर्ती नहीं की जा रही, जिससे काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है। रोजाना सैकड़ों रोगियों का चेकअप करने के अलावा उन्हें छात्राओं को पढ़ाना भी पड़ता है। साथ ही रात को वार्ड में जाकर रोगियों को संभालना होता है। ऑपरेशन आदि के लिए अलग से समय की जरूरत रहती है। इस बारे में कई बार निदेशक व अन्य अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया है। पिछले दिनों करनाल स्थित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की ओर से चिकित्सकों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसके लिए यहां के दर्जन भर चिकित्सकों ने आवेदन किया था। संभव है कि सभी को नियुक्ति मिल जाए।
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बाहरी हस्तक्षेप से चिकित्सक परेशान
खानपुर कलां मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों के रहने के लिए मकान तक बनाए गए हैं। फिर भी यहां नियुक्त चिकित्सक माहौल सही नहीं मानते हैं। खेतों में काम करने वाले गांव के लोग भी रात को यहां आराम करने आ जाते हैं। कुछ चिकित्सकों का कहना है कि बाहरी लोगों की दखल अंदाजी ज्यादा है। अधिकांश चिकित्सक सोनीपत में किराए के मकानों में रहते हैं। 

मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एसपीएस बत्रा का कहना है कि यह तो काम करने वाले की इच्छा पर निर्भर करता है कि कौन काम करना चाहता या नहीं। जहां तक सुविधाओं की बात है तो किसी प्रकार की परेशानी नहीं है। बाहरी हस्तक्षेप पहले होता था, अब किसी भी बाहरी आदमी को रिहायशी क्षेत्र में घुसने की अनुमति नहीं है। रोगियों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
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