दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे के बनने से जिन किसानों के चकबंदी या तकसीम के समय लगे रास्ते बंद हो गए हैं, उनका फिर से निर्माण करवाया जाए। जिससे किसानों को खेतों में जाने के लिए रास्ता मिल सके। यह निर्देश उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने एनएचएआई व राजस्व विभाग के अधिकारियों को दिए।
वह लघु सचिवालय में एक्सप्रेस-वे के निर्माण से प्रभावित गांवों के किसानों की समस्या सुनने के साथ एनएचएआई अधिकारियों को समाधान के निर्देश दे रहे थे। उन्होंने गांव पुठी, रूखी, गंगेसर, बुटाना खेतलान, गोरड़, भैंसवान खुर्द, गिवाना के किसानों की समस्याएं सुनीं। उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने निर्देश दिए कि एक्सप्रेस-वे के निर्माण से जिन किसानों के खेतों में नहरी पानी पहुंचने में कोई परेशानी आ रही है, उनकी समस्या दूर की जाए। जरूरत पड़े तो पाइपलाइन दबाएं।
उन्होंने कहा कि किसी किसान की एक जगह जमीन थी और उसके दो हिस्से हो गए तो एक्सप्रेस-वे की दूसरी तरफ बचे खेत का रास्ता बंद हो गया तो उस खेत को भी नजदीक स्थित रास्ते से जोड़ा जाए। इसके लिए संबंधित कानूनगो व पटवारी मौका मुआयना करें। जिन खेतों में नए रास्ते बनाने हैं, उनकी 31 दिसंबर तक रिपोर्ट तैयार करें, जिससे एनएचएआई उन खेतों को रास्ता देने के लिए भूमि का अधिग्रहण कर सके।
लिखित शिकायत डीआरओ कार्यालय में जमा करवाएं किसान
उपायुक्त ने किसानों से आह्वान किया कि एक्सप्रेस-वे के निर्माण से जिन किसानों के खेतों में जाने वाला रास्ता बंद हो गया है, वह लिखित शिकायत डीआरओ कार्यालय में जमा करवाएं। किसानों के खेतों तक रास्ता बनवाया जा सके। बैठक में कुछ गांवों के सरपंचों ने मांग रखी कि उनकी पंचायत की अधिग्रहण हुई जमीन के पैसे नहीं मिले हैं। उपायुक्त ने एनएचएआई के परियोजना निदेशक जगभूषण को निर्देश दिए कि मुख्यालय बात करें, ताकि इन पंचायतों को पैसा मिल सके। इस मौके पर डीआरओ हरिओम अत्री, डीडीपीओ जितेंद्र कुमार सहित एनएचएआई के अधिकारी व विभिन्न गांवों के किसान मौजूद रहे।