सोनीपत। राई स्थित डाॅ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में विधिक प्रणाली के भारतीयकरण विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मीनाक्षी आई. मेहता ने दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। सम्मेलन की अध्यक्षता कुलपति एवं सेवानिवृत्त डीजीपी अशोक कुमार ने की।
सम्मेलन में देशभर के न्यायविद, अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी, शिक्षाविद व पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया। साथ ही न्याय प्रणाली के भारतीयकरण पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह ने विधि विश्वविद्यालय परिसर में लेडी जस्टिस की प्रतिमा का लोकार्पण किया।
उन्होंने कहा कि न्याय के लिए लड़ना व इंसाफ प्राप्त करना प्रत्येक नागरिक का जन्मसिद्ध अधिकार है। जिस प्रकार ईश्वर सभी के साथ समान व्यवहार करते हैं, उसी तरह न्याय प्रणाली को भी निष्पक्ष व सर्वसुलभ होना चाहिए। कुलपति अशोक कुमार ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारतीय न्याय प्रणाली को विदेशी प्रभाव से मुक्त कर भारतीय संदर्भ में विकसित किया जाए। भारतीय न्याय संहिता-2023 इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यातिथि न्यायमूर्ति मीनाक्षी आई मेहता ने बताया कि बीएनएस-2023 औपनिवेशिक कानूनों की जगह लेगा और न्याय को अधिक प्रभावी बनाएगा। इस सत्र में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह, जेएनयू से प्रो. रामनाथ झा, पंजाब विश्वविद्यालय से प्रो. देवेंद्र सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रो. किरण गुप्ता, प्रो. डॉ. एल पुष्प कुमार, महेंद्रगढ़ के स्कूल ऑफ लॉ से डॉ. प्रदीप सिंह ने विचार व्यक्त किए।
दूसरे सत्र में विद्युत नियामक आयोग के सदस्य मुकेश गर्ग ने कहा कि नई भारतीय न्याय संहिता, नागरिक सुरक्षा संहिता व साक्ष्य अधिनियम लागू होने से न्याय प्रक्रिया तेज और अधिक पारदर्शी होगी। इस सत्र में हरियाणा राज्य विधि आयोग के सदस्य इंद्रजीत मेहता, उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी डाॅ. बिक्रम सिंह, प्रो. अंजू वाली टिकू, प्रो. वगेश्वरी देशवाल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से प्रो. अमित लूदरी, जामिया इस्लामिया से प्रो. असद मलिक, विश्वविद्यालय विधि अध्ययन संस्थान से डाॅ. सीमा गुप्ता वक्ता के रूप में मौजूद रहे।
तीसरे सत्र में न्याय निर्णयन में तकनीकी उपकरणों के उपयोग पर पंजाब विश्वविद्यालय से प्रो. देवेंद्र सिंह ने बताया कि डिजिटल तकनीकों जैसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, डिजिटल कोर्ट्स व डाटा सुरक्षा उपायों से न्यायप्रणाली अधिक सुलभ व पारदर्शी बन रही है। इस सत्र में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता, सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता डाॅ. पवन दुग्गल, केंद्र सरकार के भाषिणी प्रभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नग, एचपी इंडिया के निदेशक शैलेश त्रिपाठी व सोनीपत की पुलिस आयुक्त नाजनीन भसीन ने वक्ता के रूप में भाग लिया। कुलसचिव प्रो. आशुतोष मिश्रा ने कहा कि तकनीकी नवाचारों के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाया जा सकता है।
फोटो 21- सोनीपत के राई स्थित डाॅ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्री- फोटो : mathura