सोनीपत सहकारी चीनी मिल में पहुंचे किसान।
- फोटो : Sonipat
सोनीपत सहकारी चीनी मिल में तकनीकी खराबी के बाद से परेशान किसानों को राहत देते हुए उनका गन्ना दूसरी मिलों में भेज दिया गया है। सोनीपत सहकारी चीनी मिल से किसानों का गन्ना रोहतक, पानीपत व गोहाना मिलों में ले जाने की अनुमति दी गई है। जिस पर बुधवार दोपहर बाद किसान अपने गन्ने को नजदीक लगती मिल में लेकर चले गए। वहीं सोनीपत चीनी मिल प्रशासन तकनीकी खराबी दूर करने की कवायद में जुटा हुआ है।
सोनीपत सहकारी चीनी मिल में पेराई सत्र 10 नवंबर को शुरू हुआ था। जिसके बाद से मिल पूरी क्षमता से नहीं चल पाया। मिल में रविवार की रात को बॉयलर की ट्यूब फटने के बाद से पेराई बंद हो गई थी। पेराई बंद होने के कारण किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सोनीपत सहकारी चीनी मिल के यार्ड में ही बुधवार को करीब 18 हजार क्विंटल गन्ना एकत्रित हो गया था। मिल में गन्ना कई दिन से लाया गया है। पेराई न होने के कारण गन्ना सूखने लगा है। वहीं तकनीकी खराबी दूर होने में कई दिन और लगने की आशंका के बीच बुधवार को किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल मिल के एमडी जितेंद्र जोशी से मिला। किसानों ने एमडी से उनका गन्ना दूसरी मिल में ले जाने की अनुमति मांगी। जिसके बाद एमडी ने किसानों को रोहतक, गोहाना व पानीपत सहकारी चीनी मिल में गन्ना डलवाने का आश्वासन दिया तथा संबंधित मिल प्रबंधन से बातचीत के बाद किसानों का गन्ना उन मिल में भिजवा दिया। जिसके बाद किसान भी अपने गन्ने को लेकर गोहाना, पानीपत, रोहतक की मिल में ले जाने लगे।
तकनीकी खराबी दूर करने में जुटा प्रबंधन
सोनीपत सहकारी चीनी मिल में बॉयलर की 50 ट्यूब खराब मिली थी। बुधवार को ट्यूब सोनीपत मिल में पहुंच गई है। मिल प्रबंधन जल्द से जल्द तकनीकी खराबी को दूर करने की कवायद में जुटा हुआ है। इस संबंध में बुधवार को सोनीपत सहकारी चीनी मिल के एमडी जितेंद्र जोशी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर समस्या के समाधान करने के निर्देश दिए। मुख्य अभियंता ने बताया कि 21 नवंबर तक तकनीकी खराबी को दूर कर दिया जाएगा और उसके बाद पेराई का काम शुरू कर दिया जाएगा।
मिल में तकनीकी खराबी दूर करने का प्रयास लगातार जारी है। जल्द खराबी को दूर कर पेराई शुरू कराई जाएगी। किसानों की मांग पर रोहतक, गोहाना, पानीपत सहकारी चीनी मिल में बात कर उनका गन्ना वहां भिजवाया गया है। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए कारगर कदम उठाए जा रहे हैं।
- जितेंद्र जोशी, एमडी, सहकारी चीनी मिल, सोनीपत