फोटो : सोनीपत के रोहणा गांव में प्रशिक्षण शिविर के दौरान जानकारी प्राप्त करते किसान। स्रोत: विभ
खरखौदा। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से शुक्रवार को गांव रोहणा में किसान प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसका मुख्य विषय सरसों की उन्नत खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देना रहा। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. जितेंद्र बामल ने बताया कि केंद्र की ओर से सरसों की फसल के प्रसार के लिए किसानों के खेतों में 50 हेक्टेयर क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन लगाए गए हैं।
बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सरसों की उन्नत किस्मों और कृषि मशीनीकरण से संबंधित अनुसंधान के लिए भी प्रदर्शन प्लाॅट स्थापित किए गए हैं ताकि किसानों को नई तकनीकों का लाभ मिल सके। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र रोहतक के वैज्ञानिक डाॅ. अजय कुमार ने किसानों को सरसों की फसल में लगने वाले खरपतवार, कीट-पतंग और विभिन्न बीमारियों की पहचान व उनके नियंत्रण के उपायों के बारे में जानकारी दी।
कृषि वैज्ञानिक डाॅ. संदीप अंतिल ने खेती में प्रयोग होने वाले कृषि यंत्रों के रखरखाव और धान की फसल के लिए धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक के बारे में किसानों को जागरूक किया। वहीं, गेहूं की फसल पर बढ़ते तापमान के प्रभाव को लेकर उन्होंने किसानों को सलाह दी कि फसल में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करें।
बताया कि यदि तापमान 30 डिग्री से अधिक हो जाए तो गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए दो फीसदी पोटेशियम नाइट्रेट का घोल बनाकर छिड़काव करें। कृषि विभाग के कृषि पर्यवेक्षक रघुराज सिंह ने विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को दालों व मूंग की फसल और डीएसआर विधि के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर समय रहते पंजीकरण कराने का आह्वान किया।