नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर किसान पिछले दस दिन से कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। यहां लगातार भीड़ बढ़ती देखकर प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को किसानों की जांच के लिए लगाया है।
वह किसानों की थर्मल स्क्रीनिंग करती है तो उनको दवाई, मास्क व कोरोना से बचाव की अन्य सामग्री बांटी जाती है। सिंघु बॉर्डर पर रोजाना 100 से ज्यादा किसान बीमार मिल रहे हैं, जिनमें 15-20 बुखार, करीब 60 शरीर में दर्द तो 30 अन्य बीमारियों से ग्रसित रहते हैं। उन सभी को दवाईयां दी जा रही है और कोरोना जांच कराने की अपील की जा रही है, लेकिन कोरोना जांच नहीं करा रहे हैं।
डीसी श्यामलाल पूनिया ने बताया कि किसानों की स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से जारी है। शुक्रवार को 884 किसानों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई, जिनमें से करीब 20 को बुखार मिला और उनको दवाई दी गई। उनको कोरोना जांच के लिए कहा गया तो उन्होंने इंकार कर दिया। वहां लोगों को 2015 मास्क बांटे गए।
डीसी ने बताया कि 519 किसानों को पैरासिटामोल की टेबलेट, 712 को बी-कॉम्पलैक्स की टेबलेट, 775 को विटामिन-सी की टेबलेट वितरित की गई हैं। 70 किसानों को ओआरएस, 205 को रैंटेक, 40 को एम्लोडीपिन, 141 को सिट्राजिन और 108 मेट्रोजिल की टेबलेट बांटी गई हैं। इसके अलावा चोटग्रस्त 11 किसानों की ड्रेसिंग भी की गई है और आयुष विभाग के 722 इम्यूनिटी बूस्टर भी वितरीत किए गए हैं।
हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने किया ट्वीट- स्वास्थ्य विभाग हरियाणा, जहां किसान धरना दे रहे हैं वहां सब जगह पर मेडिकल हेल्प कैंप लगाएगा। जहां पर डॉक्टर, दवाइयां, एम्बुलेंस सब मौजूद रहेंगी। वैसे तो पहले दिन से ही रेडक्रास वहां पर काम कर रहा है।