कृषि कानूनों के विरोध में किसान नेताओं ने कोरोना का टीका लगवाने से इनकार कर दिया है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, जोगिंदर सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल ने सबसे पहले इसका विरोध किया है और कोरोना से नहीं डरने की बात कही है। इसके साथ ही किसान नेताओं ने कहा कि खेतों में काम करने वाले किसानों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत है और इसलिए ही बॉर्डर पर तीन महीने में कोई कोरोना का मरीज नहीं मिला है। इसलिए वह कोरोना का टीका नहीं लगवाएंगे।
देश में मंगलवार से कोरोना का टीका लगाने के तीसरे चरण की शुरुआत हो गई है। जिसमें वरिष्ठ नागरिकों के अलावा 45 साल से ज्यादा उम्र वाले गंभीर बीमार लोगों को टीका लगाया जा रहा है। लेकिन किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे अधिकतर नेता बुजुर्ग हैं और उन्होंने कोरोना का टीका लगवाने से इनकार कर दिया है। भाकियू राजेवाल के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल की उम्र करीब 75 साल है। इसके बावजूद उन्होंने कोरोना का टीका लगवाने से इनकार कर दिया है।
भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के अध्यक्ष जोगिदर सिंह उगराहां की उम्र करीब 70 साल है। उनका कहना है कि सरकार ने आंदोलन खत्म कराने के लिए कोरोना का डर भी दिखाया था, लेकिन तीन महीने में कोरोना नहीं हुआ तो अब कैसे होगा। इसलिए वह कृषि कानूनों के विरोध में कोरोना का टीका नहीं लगवाएंगे।
भाकियू हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि पिछले तीन महीने से वह भीड़ के बीच है, जब उस समय कोरोना नहीं हुआ तो अब क्या होगा। उन्होंने कहा कि हम कोरोना का टीका नहीं लगवाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोरोना के नाम पर लोगों को खूब डराया, लेकिन वह उससे नहीं डरते है और टीका भी नहीं लगवाने वाले है।