अब नेशनल हाईवे 44 पर पहले की तरह स्थिति होने के साथ ही केजीपी-केएमपी खुलने से जहां अन्य जिलों को राहत मिल गई है। वहीं सोनीपत के लिए स्थिति पहले की तरह रहेगी और यहां कुछ औद्योगिक क्षेत्र में ही फैक्टरियां चल सकेंगी। जबकि कुंडली के उद्यमियों को अभी राहत नहीं मिलेगी।
आंदोलन के कारण व्यापार भी हो रहा प्रभावित
दिल्ली से सटे जिलों सोनीपत, बहादुरगढ़, झज्जर, रोहतक, पानीपत आदि का व्यापार पूरी तरह से दिल्ली के साथ जुड़ा हुआ है। इन जगहों के व्यापारी कपड़ा, जूते, रेडीमेड कपड़ा, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी आदि को दिल्ली से लाकर यहां बेचते हैं। लेकिन दिल्ली बॉर्डर पहले से जाम है तो पिछले चार दिनों से हालात खराब हो रहे थे। शहर के बाजारों से सामान भी खत्म होने लगा और व्यापारियों के लिए परेशानी होने लगी। हालांकि अब कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
जिस तरह से किसान आंदोलन में बवाल हो रहा है, उससे फैक्टरी मालिकों की हालत खराब होती जा रही है। कुंडली औद्योगिक क्षेत्र को पहले ही नुकसान झेलना पड़ रहा है, वहीं चार दिन से स्थिति ज्यादा खराब हो गई थी। जिले के औद्योगिक क्षेत्र में पिछले चार दिन में एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इस तरह से उद्यमी फंस गए हैं, जिसका सरकार को कोई समाधान करना चाहिए। - सुभाष गुप्ता, अध्यक्ष कुंडली औद्योगिक एसोसिएशन।
हमारे यहां बाजार में अधिकतर सामान दिल्ली से आता है और दिल्ली के सभी रास्ते पूरी तरह से बंद होने से परेशानी होती है। किसान आंदोलन का व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। इसलिए इसका सरकार को कोई समाधान करना चाहिए। ऐसे ही सबकुछ चलता रहा तो स्थिति ज्यादा खराब हो जाएगी। - संजय सिंगला, अध्यक्ष जिला व्यापार मंडल।