नेहा ने हॉकी में तेजी से मुकाम हासिल किया था। 14 साल की उम्र में जूनियर नेशनल खेलने के बाद 2011 में जूनियर एशिया कप खेला और उसमें देश को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उसी साल खेले गए अंडर-21 अंतरराष्ट्रीय लाल बहादुर शास्त्री कप में भी नेहा गोयल को जगह मिली और उसमें न्यूजीलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों को हराकर देश को चैंपियन बनाया। इसमें नेहा को बेस्ट प्लेयर का अवार्ड भी मिला। वर्ष-2016 में हुए साउथ एशियन गेम्स में देश को चैंपियन बनाने में नेहा गोयल का अहम योगदान रहा।
नेहा फारवर्ड पॉजिशन पर खेलती हैं और वह सीनियर टेस्ट मैच, चैंपियन कप समेत अन्य चैंपियनशिप में भी देश के लिए खेल चुकी हैं। इस समय भी वह रेलवे की ओर से खेलती हैं। नेहा कहती हैं कि उनको इस मुकाम तक पहुंचाने में मां सावित्री देवी ने जिस तरह से मेहनत की है, वह एक मिसाल है।
नेहा कहती हैं कि भारतीय हॉकी टीम की कप्तान रहीं उनकी कोच प्रीतम सिवाच व उनके पति कुलदीप ने भी उनका काफी सहयोग किया और अच्छी हॉकी खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। उनसे प्रशिक्षित नेहा गोयल ने एशियन गेम्स में भारत को रजत दिलाने में अहम भूमिका अदा की है। नेहा का लक्ष्य टोक्यो ओलंपिक में देश को पदक दिलाना है।