सोनीपत। नगर निगम में भ्रष्टाचार की शिकायत शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज को करने वाले को अफसर ढूंढ नहीं सके और फाइल को बिना जांच के बंद कर दिया गया। शिकायत में नगर निगम की लेखा शाखा के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। जिनपर ठेकेदारों को बिल की फोटो स्टेट कॉपी के आधार पर 59 लाख रुपये तक के भुगतान करने का आरोप था तो ऑनलाइन भुगतान नहीं करने के आरोप भी लगाए गए थे। जिसमें लेखा शाखा के कई अधिकारियों के नाम लिखकर भ्रष्टाचार में शामिल बताया गया है। मंत्री अनिल विज ने शिकायत को गंभीरता से लेकर विजिलेंस जांच शुरू कराई थी तो चीफ विजिलेंस ऑफिसर ने निगम के कमिश्नर से जांच रिपोर्ट मांगी थी। जिसकी जांच रिपोर्ट में कह दिया गया है कि शिकायत कर्ता नोटिस देने के बाद भी नहीं आया, इसलिए जांच बंद कर दी गई।
दिल्ली के रहने वाले अनिल कुमार ने शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज को सोनीपत नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए शिकायत भेजी थी। जिसमें अनिल कुमार ने तीन अधिकारियों के नाम लिखकर आरोप लगाए थे कि लेखा शाखा के अधिकारी अपने यहां के कर्मचारियों के पदोन्नति, एसीपी स्केल लगाने समेत अन्य छोटे काम के बदले भी रुपये लेते हैं। उनके रुपये नहीं देने पर रिकार्ड खराब करने की धमकी दी जाती है और इस कारण ही कोई शिकायत नहीं करता है।
आरोप लगाया गया है कि आरडब्ल्यूए को रिश्वत नहीं देने के कारण परेशान किया जाता है और सेक्टर-12 की आरडब्ल्यूए के पार्कों के रखरखाव के बिल को ऑडिट होने के बावजूद गायब कर दिया गया। जिससे वह देखरेख बंद कर दे और वहां काम नहीं होने पर सरकार की छवि खराब हो जाए। आरोप लगाया गया था कि लेखा शाखा में लगभग 8 अधिकारी व कर्मी हैं, लेकिन उनमें से चार को अन्य शाखा में लगा दिया गया। क्योंकि उनके लेखा शाखा में रहने से भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता था। मंत्री अनिल विज को भेजी शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ठेकेदारों से चेक काटने की एवज में 4-5 प्रतिशत कमीशन लिया जाता है। आरोप लगाया गया कि ड्रेन नंबर 6 को पक्का करने वाले ठेकेदार के बिल को गायब कर दिया गया और उसके बाद फोटो कॉपी के आधार पर 59 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। यह भी आरोप था कि निगम में ठेकेदारों को भुगतान ऑनलाइन की जगह चेक देकर किया जाता है। मंत्री अनिल विज ने निगम में इस तरह से भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद विजिलेंस जांच शुरू कराई थी। जिसमें शहरी स्थानीय निकाय के चीफ विजिलेंस ऑफिसर ने निगम कमिश्नर से अपने स्तर से जांच कराकर रिपोर्ट भेजने को कहा था। इसकी जांच ज्वाइंट कमिश्नर को सौंपी गई थी, जिन्होंने जांच करने के बाद रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपी है।
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शिकायतकर्ता नहीं आया, इसलिए जांच बंद कर दी गई
निगम की लेखा शाखा के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के साथ ही शिकायत में साफ बताया गया था कि किस-किस जगह पर घपला किया गया है। उसके बाद भी निगम ने जिस तरह की रिपोर्ट भेजी है, उसमें कहा गया है कि शिकायतकर्ता को तीन बार नोटिस भेजा गया। उसके बावजूद वह जांच में शामिल नहीं हुआ, इसलिए शिकायत को बोगस मानते हुए जांच बंद कर दी गई। लेकिन जिस तरह से शिकायत में सबकुछ साफ किया गया था, उसके आधार पर अधिकारी अपने स्तर पर भी जांच कर सकते थे। जिससे यह साफ हो सकता था कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही है या गलत। उसके बावजूद शिकायत कर्ता के नहीं आने की बात कहकर जांच बंद की गई।
वर्जन
निगम कमिश्नर की ओर से जांच सौंपी गई थी। उसमें शिकायत करने वाले को तीन बार नोटिस दिया गया, जिससे वह जांच में शामिल होकर अपनी बात बता सके। उसने एक बार भी जवाब नहीं दिया और वह जांच में शामिल भी नहीं हुआ। वह बोगस शिकायत थी, जिसकी रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप दी गई है।
- सुभाष चंद्र, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम