सोनीपत। भविष्य की जल जरूरत पूरी करने के लिए गांव देवडू में प्रस्तावित 50 एमएलडी क्षमता के नहरी आधारित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की कवायद तेज हो गई है। प्लांट के लिए कच्चा पानी उपलब्ध कराने को लेकर बुधवार को मेयर राजीव जैन की अध्यक्षता में सिंचाई विभाग और सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण (एसएमडीए) के अधिकारियों की बैठक हुई।
इसमें बड़वासनी स्थित पश्चिमी यमुना नहर और राजपुरा माइनर से पानी उपलब्ध कराने के विकल्पों पर चर्चा की गई। सिंचाई विभाग दोनों विकल्पों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करेगा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में हुई एसएमडीए की बैठक में नहरी पेयजल योजना का प्रस्ताव तैयार करने को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। निगम में शामिल गांवों में भूजल पीने योग्य नहीं होने के कारण नहरी पानी उपलब्ध कराने की मांग उठ रही है। परियोजना के तहत पश्चिमी यमुना नहर से पानी लाकर उसका शोधन किया जाएगा।
इसके बाद पूर्वी जोन और आसपास के गांवों में आपूर्ति की जाएगी। इससे पूर्वी जोन के उपभोक्ताओं को जाजल रेनीवेल जल स्रोत के साथ नहरी पानी भी उपलब्ध हो सकेगा।
पुरखास अड्डे के पास स्थित मेयर कार्यालय में हुई बैठक में एसएमडीए के चीफ इंजीनियर राजीव गुप्ता, कार्यकारी अभियंता आलोक कुमार, उपमंडल अभियंता अंकित लोहान, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता मंजीत हुड्डा और कार्यकारी अभियंता नितिन कुमार मौजूद रहे।
140 एमएलडी की जरूरत, अभी 70 एमएलडी पानी उपलब्ध
मेयर राजीव जैन ने बताया कि वर्तमान में निगम क्षेत्र में विभिन्न स्रोतों से करीब 70 एमएलडी पानी उपलब्ध है। करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से दो नए रेनीवेल बनाने की परियोजना मंजूर हो चुकी है और इसका टेंडर भी अलॉट किया जा चुका है। इनके बनने के बाद पानी की उपलब्धता करीब 90 एमएलडी हो जाएगी। भविष्य में निगम क्षेत्र में करीब 140 एमएलडी पानी की आवश्यकता अनुमानित है। इसी जरूरत को देखते हुए देवडू में 50 एमएलडी क्षमता का नहरी आधारित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित किया गया है।
जाजल रेनीवेल से रोजाना 14 लाख लीटर पानी की आपूर्ति
जाजल स्थित रेनीवेल से रोजाना 14 लाख लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा पूर्वी क्षेत्र में 74 ट्यूबवेल लगे हैं। इनसे शहर के बूस्टिंग स्टेशनों में बने टैंकों को भरा जाता है और वहां से पानी की आपूर्ति की जाती है। गर्मी में पेयजल की मांग बढ़ने से क्षेत्र में किल्लत की स्थिति बन जाती है। नहरी आधारित प्लांट से अतिरिक्त पानी उपलब्ध होने पर पूर्वी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
फोटो : सोनीपत के देवडू के पास वह जगह, जहां पर नहरी आधारित जल शोधन संयंत्र बनाया जाएगा। संवाद