माई सिटी रिपोर्टर
सोनीपत। डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में मंगलवार को बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
कुलपति डॉ. देविंदर सिंह ने डॉ. आंबेडकर के जीवन, विचारधारा एवं समकालीन भारत में उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से समानता, न्याय एवं सांविधानिक नैतिकता के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
कुलपति ने कहा कि बाबा साहेब के लिए शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधन थी। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए कानून को सामाजिक न्याय का प्रभावी माध्यम बनाया।
मुख्य अतिथि आकाशदीप नागल ने डॉ. आंबेडकर की विरासत के तीन प्रमुख स्तंभ संविधान, आरक्षण एवं जाति व्यवस्था के उन्मूलन पर विस्तार से चर्चा की। कुलसचिव डॉ. आशुतोष मिश्रा ने बाबा साहेब के प्रशासनिक दृष्टिकोण, विधिक समझ एवं संस्थागत निर्माण में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर के सिद्धांत आज भी शैक्षणिक संस्थानों के संचालन एवं समाज में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए मार्गदर्शक हैं। वक्ताओं ने स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि मंत्री के रूप में डॉ. आंबेडकर के योगदान को भी रेखांकित किया।
विशेष रूप से हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं के अधिकारों को सशक्त बनाने के उनके प्रयासों का उल्लेख किया। यद्यपि यह विधेयक तत्कालीन परिस्थितियों में पूर्णरूप से पारित नहीं हो सका लेकिन इसने आगे चलकर कई महत्वपूर्ण सामाजिक सुधारों की आधारशिला रखी।
इस अवसर पर कुलपति के ओएसडी ललित कुमार, निजी सचिव राजेश कुमार, सुरक्षा सलाहकार सुधीर, डॉ. बलविंदर कौर, डॉ. सुंदर, डॉ. अमित गुलेरिया, डॉ. आशुतोष, डॉ. ज्योति शर्मा, डॉ. सुभित, अपूर्व मिश्रा, अभिषेक आदि उपस्थित रहे।